आटा। प्रशासन के तमाम इंतजामों के बाद भी अन्ना मवेशियों का कहर जारी है। शनिवार रात अन्ना मवेशियों ने कहर बरपाते हुए कहटा गांव के तीन किसानों की 30 बीघा की फसल चट कर दी। इससे किसानों में आक्रोश है किसानों का कहना है कि कई बार मांग की गई, लेकिन अब तक गांव में गोशाला का निर्माण नहीं कराया गया, जिससे गांव के किसानों को आए दिन अन्ना समस्या से जूझना पड़ रहा है।
भीषण सर्दी व कोहरे में जहां लोग चैन की नींद सो रहे हैं, वहीं किसान हाथों में लाठी लेकर खेतों की रखवाली करने का मजबूर है। फिर भी जरा सी चूक पर अन्ना मवेशियों का झुंड खेत की फसलों को नष्ट कर रहा है। ग्राम कहटा में अन्ना मवेशियों ने बाबू राजपूत की 10 बीघा, शिवकुमार 12 बीघा, रामकुमार की 8 बीघा लाही की फसल को नष्ट कर दिया। किसानों ने बताया कि गांव में कोई गोशाला नहीं है जबकि क्षेत्र में करीब 500 अन्ना मवेशियों का झंड घूम रहा है। कई बार प्रशासन ने गांव में अस्थायी गोशाला बनवाने की मांग की गई, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। वहीं मामले पर उपजिलाधिकारी कालपी कौशल कुमार ने बताया कि सूचना मिली है। मौके पर सचिव व लेखपाल को भेजा गया है। साथ ही जल्द ही गांव में गोशाला का निर्माण करा दिया जाएगा।
किसानों ने आपसी सहयोग से खोली गोशाला
कालपी। अन्ना पशुओं की समस्या से निपटने के लिए कदौरा ब्लाक के ग्राम दशहरी के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर जन सहयोग से ही गांव में गो आश्रय केंद्र बनाया है। यहां गोवंशों के खाने पीने की व्यवस्था के साथ किसान देखरेख भी कर रहे है। काशीरामपुर, परासन गांव के बीच में दशहरी गांव में प्रगतिशील कृषक ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने अपनी निजी भूमि में गो आश्रय स्थल स्थापित किया है। चारों ओर तारों की बाड़ लगाकर गो आश्रय स्थल के अंदर खाने पीने व गोवंशो के सर्दी से बचाने की व्यवस्था की है। वर्तमान में गो आश्रय स्थल में 45 गोवंश है। ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया एवं अन्य किसान सुबह एवं शाम को गोवंशो को खाने पीने की व्यवस्था करते हैं व बीमार पशुओं का उपचार भी कराते हैं। गांव में जागरूक करके खुलेआम पशुओं को छोड़ने से मना करते हैं। एसडीएम कौशल कुमार का कहना है कि अन्य गांव के लोगों को भी दशहरी गांव के ग्रामीणों से प्रेरणा लेनी चाहिए।