चार दिन से दोबारा संविदा पर तैनाती की मांग को लेकर धरना दे रहीं हटाई जा
चुकी एएनएम को शुक्रवार को पुलिस ने बलपूर्वक हटा दिया। इस दौरान विरोध
करने पर महिलाओं के साथ पुलिस के बदसलूकी व मारपीट करने का आरोप भी लगाया
गया है। पुलिस की कार्रवाई से भड़की एएनएम ने डीएम कार्यालय पहुंचकर जमकर
हंगामा काटा। पुलिस की इस
कार्रवाई का राज्य कर्मचारी संगठनाें ने विरोध
करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। वर्ष 2015 में एनआएचएम के तहत संविदा पर
एएनएम की तैनाती की गई थी लेकिन बजट के अभाव में इनमें से 16 एएनएम को
शासन ने हटा दिया था। इस पर इन्होंने तत्कालीन सीएमओ से वार्ता की थी। तब
सहमति बनी थी कि आने वाले समय में जो भी रिक्तियां
आएंगी उन पर उनकी तैनाती
कर दी जाएगी। अब शासन से रिक्तियां आईं तो हटाई गई एएनएम ने सीएमओ डा.
आशाराम से दोबारा तैनीती की मांग की। आरोप है कि उन्हाेंने सीधे भर्ती से
साफ इंकार करते हुए फिर से आवेदन करने को कहा। इस पर चार दिनाें से हटाई गई
एएनएम साएमओ कार्यालय में ही धरने पर बैठी थीं।
शुक्रवार की दोपहर बाद
करीब ढाई बजे सीओ जंगबहादुर यादव कोतवाली पुलिस व महिला सिपाहियाें के साथ
मौके पर पहुंचे और आंदोलन कर रहीं इन एएनएम से हटने को कहा। आंदोलनकारी
महिलाएं नहीं हटीं तो आरोप है कि पुलिस ने मारपीटकर जबरन हटा दिया। इसके
बाद आंदोलनकारी रविंद्री, शालनी, शशिकांत अवस्थी आदि ने पुलिस पर
मारपीट व
अंगूठी छीनने का आरोप लगाकर डीएम कार्यालय में जमकर हंगामा काटा। संघ के
जिलाध्यक्ष अश्वनी पांडे ने कहा कि पुलिस चाहे कितने भी जुल्म कर ले आंदोलन
वापस नहीं लेंगे। उधर महिलाआें के साथ बदसलूकी पर नाराजगी जताई है। इस
बाबत सीओ जंगबहादुर सिंह ने बताया कि जिले में 144 धारा लागू है। उन लोगाें
ने कोई
लिखित आदेश प्रशासन से नहीं लिया था लिहाजा उनको हटा दिया है। बल
पूर्वक या मारपीट कर नहीं हटाया गया है। उनका धरना ही असंवैधानिक था।