अमर सिंह अध्यक्ष और हरिश्चंद्र बने कनिष्ठ उपाध्यक्ष
बार एसोसिएशन के चुनाव में हुआ रोचक मुकाबला
फोटो-30 अध्यक्ष अमर सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष हरिश्चंद्र
फोटो-31 प्रमाण पत्र के साथ बार एसोसिएशन के पदाधिकारी।
संवाद न्यूज एजेंसी
कालपी/आटा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बार एसोसिएशन का चुनाव संपन्न हुआ। अध्यक्ष पद पर अमर सिंह निषाद को 79 वोट तो प्रतिद्वंद्वी रामकुमार तिवारी को 48 वोट मिले तो अमर सिंह ने 31 वोटों से जीत दर्ज की। कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर हरिश्चंद्र कुलश्रेष्ठ ने 7 वोटों से जीत दर्ज की।
चुनाव में कुल 133 अधिवक्ताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना था, लेकिन 129 अधिवक्ताओं ने ही वोट डाले। अध्यक्ष पद पर दो प्रत्याशियों के बीच हुए चुनाव में अमर सिंह निषाद को 79 वोट मिले जबकि रामकुमार तिवारी को 48 वोट मिले। दो वोट अवैध पाए गए। वहीं कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर 124 वोट पड़े. जिसमें हरिश्चंद्र कुलश्रेष्ठ को 66 वोट मिले जबकि सौरभ तिवारी को 58 वोट मिले। दोपहर तीन बजे मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए गए। एल्डर्स कमेटी के सदस्यों की निगरानी में निर्वाचन अधिकारी जयवीर सिंह यादव की मौजूदगी में मतदान हुआ। बता दें कि कई पदों पर एक-एक नामांकन पत्र दाखिल होने की वजह से निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया संपन्न हुई। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर सलीम अंसारी. महामंत्री पद पर मनोज जाटव. कोषाध्यक्ष पद पर रविंद्र श्रीवास्तव. संयुक्त मंत्री पद पर अशोक श्रीवास. कार्यकारिणी सदस्यों में इनायत अली हाशमी व मंगल सिंह निर्विरोध निर्वाचित किए गए। चुनाव के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोतवाल मानिकचंद पटेल भी फोर्स के साथ डटे रहे। विजेताओं को एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य राजेंद्र सिंह, श्रीराम बघेल, संतोष शुक्ला, अनिल पोरवाल निर्वाचन अधिकारी ने विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र सौंपे। चुनाव के नतीजे जानने के लिए राजनीतिक दलों के लोग भी तहसील परिसर में डटे रहे।
- प्रत्याशियों का जोर, नारेबाजी का शोर
पिछले कई दिनों से अध्यक्ष पद पर चुनाव को लेकर दोनों पूर्व अध्यक्षों के बीच छिड़ा घमासान शुक्रवार को वोटिंग के वक्त भी नजर आया। दोनों के समर्थक सुबह से ही अपने अपने नेता के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आए। जिससे आखिरी वोटिंग तक चुनाव की रोचकता बनी रही।
-कई ने बदला पाला तो पलटा परिणाम
यूं तो प्रचार से अध्यक्ष पद के चुनाव में घमासान दिखाई दे रहा था। कभी रामकुमार तो कभी अमर सिंह का पलड़ा भारी रहता था। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि हार जीत की असली लड़ाई तो वोटिंग के वक्त ही देखने को मिली, जब कई मतदाताओं ने पाले बदलकर वोट किए और फैसला सभी के सामने आया।