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बारिश से किसानों में कहीं खुशी, कहीं गम

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उरई-जालौन। बुधवार की सुबह से बारिश होने से किसानों के माथे पर बल पड़ गए। किसानों के लिए यह बेमौसम की बारिश किसी मुसीबत से कम नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए तो रिमझिम बारिश फायदेमंद है लेकिन सरसों, मटर, मसूर व चना की फसलों में रोग लगने की आशंका है।
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मंगलवार से ही घने बादल छाए रहे। बुधवार सुबह बूंदाबांदी शुरू हो गई। नगर व ग्रामीण इलाके में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हुई। कई बार तेज बारिश हुई। वैज्ञानिकों के मुताबिक आलू, हरी मटर, चना, मसूर और सरसों की फसल के लिए ये मौसम ठीक नहीं है। आलू में झुलसा रोग लगने की आशंका है। जबकि सरसों के फूल टूटने और फसल के पलटने की भी आशंका बनी हुई है। प्रगतिशील कृषक राजीव माहेश्वरी ने बताया कि दलहनी फसलों को बारिश के कारण नुकसान हुआ है। दलहनी फसल वैसे भी मुश्किल से तैयार होती है और अब बारिश से नुकसान हो रहा है। किसान श्यामू लौना ने बताया कि सरसों की फसल में फूल अच्छा आया है, लेकिन रुक-रुककर हो रही बारिश से फसल खराब हो जाएगी। पत्तियों में भी दाग पड़ जाएंगे।
महेबा के किसान हरिनारायण ओमर का कहना है कि रबी की फसल के लिए बारिश ठीक नहीं है। लाही, मटर और मसूर को काफी नुकसान होने की आशंका है। किसान की रातों की रखवाली भी व्यर्थ जाएगी।
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सिरसाकलार स्थित जटहौली के किसान अहबर्न सिंह का कहना है कि बारिश मसूर व मटर की फसल के लिए नुकसानदायक है। मटर की फलिया में दाग लगने का डर है। गेहूं, ज्वार व चना को फिर भी फायदा होगा।
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