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Jalaun News: उरई में नई टाॅउनशिप विकसित की जाएगी, भूमि खरीद जल्द

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उरई। उरई विकास प्राधिकरण की 29वीं बोर्ड बैठक शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त झांसी विमल कुमार दुबे ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उरई में नई टाउनशिप विकसित की जाएगी। इसके लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया नियम अनुसार की जाएगी। इसके साथ ही प्राधिकरण के विकास क्षेत्र का विस्तार करने की मंजूरी भी दी गई।
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बैठक में यह बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राधिकरण ने तय लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। अब एनएच-25 (कानपुर रोड) से चौरासी आवास योजना तक सड़क चौड़ीकरण, जालौन चुंगी से मेहरबाबा केंद्र तक सड़क निर्माण और प्राइवेट बस स्टैंड तक स्ट्रीट लाइट लगाने जैसे कार्यों को भी स्वीकृति मिल गई है। इसके अलावा बंबी रोड से प्राधिकरण कार्यालय तक सीसी रोड निर्माण का प्रस्ताव भी पारित हुआ। सबसे अहम फैसला मॉडल भवन निर्माण उपविधियों और जोनिंग रेगुलेशन-2025 को लागू करने को लेकर लिया गया।
इसमें कई बड़े बदलाव हुए हैं, जो सीधे तौर पर आम जनता को राहत देंगे। अब 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यवसायिक भवनों के लिए मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता नहीं रहेगी। ऐसे भवन स्वामी सिर्फ 1 रुपये का शुल्क जमा कर पोर्टल पर आर्किटेक्ट से ड्राइंग का पंजीकरण करवा सकेंगे। यह सुविधा उन्हीं भूखंडों पर लागू होगी जो विवादित न हों, अनाधिकृत कॉलोनियों में न हों और सड़क की न्यूनतम चौड़ाई का पालन करते हों।
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विकास प्राधिकरण ने भवनों के डिजाइन और मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तीन श्रेणियां लो रिस्क, मीडियम रिस्क और हाई रिस्क निर्धारित की हैं। इसके अलावा अब आवासीय भवनों के 25 फीसदी फ्लोर एरिया को डॉक्टर, वकील या सीए जैसे प्रोफेशनल कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकेगा, बशर्ते पार्किंग की उचित व्यवस्था हो।
पहली बार प्राधिकरण ने भवनों की ऊंचाई को लेकर छूट दी है। अब जिन सड़कों की चौड़ाई 45 मीटर से अधिक है, वहां ऊंचाई की कोई सीमा नहीं रहेगी। हालांकि एयरपोर्ट अथॉरिटी और एएसआई जैसे विभागों से एनओसी अनिवार्य होगी। साथ ही, ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए भूमि क्षेत्रफल की न्यूनतम सीमा भी कम की गई है। निर्मित क्षेत्र में अब 1000 वर्गमीटर और अनिर्मित में 1500 वर्गमीटर पर यह योजना स्वीकृत की जा सकेगी।
एकल आवासीय भवनों में अब तीन मंजिलों तक अलग-अलग किचन की अनुमति होगी। 300 वर्गमीटर से छोटे भूखंडों पर स्टिल्ट के साथ तीन मंजिलें और उससे बड़े भूखंडों पर चार मंजिलें बनाई जा सकेंगी। प्रीमियम एफएआर की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे ऊंचे भवन बनाने की राह और आसान हो जाएगी। भू-आच्छादन की बाध्यता समाप्त कर दी गई है, लेकिन सेटबैक और एफएआर का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
बैठक में जिलाधिकारी और प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय, बोर्ड सदस्य बृजभूषण सिंह मुन्नू, अनिल यादव, सचिव परमानंद यादव, सहयुक्त नियोजक रविंद्र गौतम, कोषाधिकारी आनंद कुमार सिंह, अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील, जल निगम के अधीक्षण अभियंता हिमांशु नेगी उपस्थित रहे। बैठक में तय किया गया कि सभी विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सरल और लाभकारी सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
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