मुहम्मदाबाद (उरई)। गुलाब जल बनाने की आड़ में खेत में चल रही 300 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स फैक्टरी का पूरा राज अभी खुलना बाकी है। महाराष्ट्र की जेल में हुई दोस्ती के बाद बुंदेलखंड तक पहुंचे इस नेटवर्क की परतें खोलने में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) जुटे हैं। बृहस्पतिवार को करीब 20 घंटे तक चली छापेमारी के बाद शुक्रवार को भी दो टीमें रामपुरा गांव पहुंचीं और फैक्टरी सहित आसपास के ठिकानों पर जांच-पड़ताल की।
टीम के सदस्यों का कहना है कि मामले का पूरा खुलासा आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के बाद ही हो सकेगा। मुख्य आरोपी शैलेंद्र पाल की गिरफ्तारी न होने के कारण टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। टीम ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, यहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के रामपुरा गांव में खेत में गुलाब जल बनाने के नाम पर फैक्टरी संचालित की जा रही थी। बृहस्पतिवार को पांच से सात गाड़ियों में पहुंची डीआरआई और एटीएस की संयुक्त टीम ने छापा मारा तो ग्रामीणों में खलबली मच गई। फैक्टरी में तीन गेट होने के बावजूद टीम के सदस्य दीवार कूदकर अंदर दाखिल हुए। अंदर मशीनों और रासायनिक सामग्री के बीच कथित तौर पर एमडी ड्रग्स तैयार किए जाने का मामला सामने आया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मौके से करीब 12.5 किलोग्राम तैयार एमडी ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये मूल्य का कच्चा माल भी मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बरामदगी और कीमत के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जांच एजेंसियों की ओर से होना बाकी है।
जांच से जुड़े घटनाक्रम के मुताबिक, महाराष्ट्र के सांगली जिले का संतोष गड़वाड़ और हमीरपुर जिले के गोहांड क्षेत्र का हेमंत कुशवाह मुंबई की जेल में बंद रहने के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। बताया जाता है कि संतोष पहले भी मादक पदार्थों के मामले में वांछित था, जबकि हेमंत बिल्डर की हत्या के मामले में जेल में बंद रहा था। जेल में हुई दोस्ती के बाद दोनों ने बाहर निकलकर अपना नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई। इसके बाद दोनों उरई पहुंचे और रामपुरा निवासी शैलेंद्र पाल सिंह के संपर्क में आए। आरोप है कि तीनों ने मिलकर उसके खेत में फैक्टरी स्थापित की।
ग्रामीणों को बताया गया था कि यहां गुलाब जल तैयार किया जाएगा। मशीनें आने और उत्पादन शुरू होने की बात कहकर शैलेंद्र ने गांव के कुछ लोगों से ब्याज पर रुपये भी लिए थे। फैक्टरी गांव के बाहरी हिस्से में खेत में होने के कारण ग्रामीणों को गतिविधियों पर ज्यादा शक नहीं हुआ।
मशीनें खोलने और सील करने में लगे कई घंटे
छापेमारी के दौरान टीम ने फैक्टरी में लगी मशीनों को खोलकर बाहर निकाला। ग्राइंडर समेत अन्य उपकरणों को सील कर दो पिकअप वाहनों में लादा गया। मौके से दो बाइक और बिना नंबर की ब्रेजा कार भी कब्जे में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। फैक्टरी को सील करने के बाद टीम ने बरामद सामान को सुरक्षा के बीच लखनऊ रवाना किया। शुक्रवार को दोबारा पहुंची टीमों ने परिसर और आसपास के स्थानों पर पड़ताल की। अधिकारियों की जांच का केंद्र बरामद रसायन, उपकरण और फैक्टरी से जुड़े दस्तावेज बताए जा रहे हैं।
शैलेंद्र की तलाश में जुटी टीमें, झांसी से पत्नी की गिरफ्तारी की चर्चा
ग्रामीणों के मुताबिक, कार्रवाई की भनक लगने पर मुख्य आरोपी शैलेंद्र पाल पत्नी के साथ गांव से चला गया था। उसकी पत्नी को झांसी जिले में स्थित उसकी ससुराल से हिरासत में लिए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल शैलेंद्र की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। टीमें उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। जांच से जुड़े टीम सदस्यों का कहना है कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ किए जाने के बाद ही फैक्टरी के संचालन, माल की आपूर्ति और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।
जनरेटर की आवाज में दबा रहा फैक्टरी का राज
ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्टरी में करीब 75 हॉर्स पावर का जनरेटर लगा था। इसका इस्तेमाल लगातार किया जाता था। दावा है कि जनरेटर में प्रति घंटे करीब पांच लीटर डीजल की खपत होती थी। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 120 लीटर डीजल खर्च होता था। फैक्टरी में पानी के टैंकर और बर्फ की सिल्ली भी मंगाई जाती थी। इन व्यवस्थाओं के बावजूद गांव के लोगों को वहां चल रही गतिविधियों की भनक नहीं लगी।
दो दिन में तैयार होती थी एक खेप
ग्रामीणों में चर्चा है कि फैक्टरी में तैयार दो किलोग्राम माल की कीमत करीब 48 करोड़ रुपये बताई जा रही थी। दावा है कि एक खेप तैयार करने में लगभग दो दिन लगते थे और इसके बाद माल दूसरी जगह भेज दिया जाता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्टरी से पहले भी नशीले पदार्थों की खेप बाहर भेजी गई थी या नहीं। सप्लाई नेटवर्क और खरीदारों की जानकारी पूछताछ के बाद ही सामने आ सकेगी।
घर से भी मिले रसायन और दस्तावेज
ग्रामीणों के मुताबिक, मुख्य आरोपी शैलेंद्र पाल के घर से भी रसायन और ड्रग्स बनाने की विधि से संबंधित सामग्री मिलने की चर्चा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि नेटवर्क की गतिविधियां केवल खेत में बनी फैक्टरी तक सीमित नहीं थीं। हालांकि, घर से बरामद सामग्री और उसकी प्रकृति के संबंध में जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
स्थानीय पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल
इतनी बड़ी फैक्टरी पकड़े जाने के बाद स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्टरी में भारी जनरेटर, मशीनें और अन्य सामान लगातार इस्तेमाल हो रहा था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी। कुछ ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के फैक्टरी में आने-जाने का दावा भी किया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। अब जांच का विषय यह भी है कि फैक्टरी कितने समय से संचालित थी और स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी जानकारी थी।
फोटो - 21 रसायन को सुरक्षित करने के लिए फैक्टरी के अंदर रखी बर्फ। संवाद- फोटो : 1
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फोटो - 21 रसायन को सुरक्षित करने के लिए फैक्टरी के अंदर रखी बर्फ। संवाद- फोटो : 1
फोटो - 21 रसायन को सुरक्षित करने के लिए फैक्टरी के अंदर रखी बर्फ। संवाद- फोटो : 1