फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बही के साथ मांगी जा रही खसरे की नकल

Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
Jalaun
विज्ञापन
विज्ञापन
उरई (जालौन)। क्रय केंद्र प्रभारियों ने जिला प्रशासन के निर्देश पर किसानों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। किसानों को बही के साथ ही खसरा की नकल देनी पड़ेगी। जिससे यह पता चलेगा कि उक्त किसान ने अपनी उस जमीन में क्या गेहूं बोया था। किसान बताते हैं कि उन्हें कई लेखपाल ढूंढे नहीं मिल रहे हैं और मिलते भी हैं तो खसरा की फोटो कापी देने में कई कई दिन लगा देते हैं। सुविधा शुल्क अलग से देना पड़ता है। एडीएम ने लेखपालों को क्रय केंद्र पर रहने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन

खदानी गांव के राधा चरण, बिनौरा के पुष्पेंद्र, कुसमिलिया के रामकुमार, नुनसाई के गुड्डू, मड़ोरा के विजय, नुनसाई के भारत सिंह, कुसमिलिया के आनंद नगाइच, जैसारी के हरिओम ने बताया कि पहले एक अप्रैल 2012 तक सरकारी के आदेश के बावजूद सरकारी केंद्र नहीं खुले जिससे किसानों के फर्जी नाम पर कुछ गल्ला आढ़तियों ने कुछ सरकारी क्रय केंद्रों के ठेकेदारों और कुछ क्रय केंद्र प्रभारियों की मदद से कई हजार टन गेहूं खरीद लिया गया। 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक बारदाना न होने के कारण किसानों के गेहूं के खरीद सरकारी क्रय केंद्रों में नहीं हो पाई और अब किसान बही के साथ केंद्र प्रभारी खसरा की नकल मांग रहे हैं। इससे किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों में अपना गेहूं बेचने और सरकार द्वारा घोषित 1285 रुपए प्रति कुंतल का भाव पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन किसानों ने कहा कि कई दिन तक लेखपाल नहीं मिलते हैं। जब मिलते भी हैं तो कई कई दिनों तक खसरा की नकल देने के लिए टालते रहते हैं इससे परेशानी होती है। इसके अलावा गांव कैथेरी सहकारी समिति में जोड़ दिए जाने से भी किसानों को नए सिरे से परेशानी उठानी पड़ रही है। उधर एडीएम लोकपाल सिंह ने किसानों को गेहूं बेचने में खसरा की नकल मिलने में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सभी लेखपालों को सरकारी क्रय केंद्र में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें