उरई (जालौन)। शनिवार की देर शाम बारिश के साथ आए आंधी-तूफान ने जिले में भारी तबाही मचाई। किसी की मौत हुई तो किसी की गृहस्थी का नुकसान हुआ। सड़कों पर पेड़ों के गिरने से यातायात प्रभावित हुआ तो विद्युत लाइनों एवं पोलों के टूटने से आपूर्ति गड़बड़ा गई। कुठौंद में तो एक ढाबा ही ढह गया। इसमें दबकर अधेड़ की मौत हो गई। कच्चे घरों के छप्पर उड़ गए तो टीन, चद्दर भी आंधी के बेग को बर्दाश्त नहीं कर सके और हवा के झोकों में उड़कर सड़कों पर आ गए। इससे पूरी तरह जनमानस सहमा रहा। 24 घंटे के बाद शहरी क्षेत्रों की तो विद्युत आपूर्ति दुरुस्त हो गई लेकिन ग्रामीण अंचल में बिजली विभाग की टीम पहुंच ही नहीं पाई।
आंधी, तूफान और पानी से सबसे ज्यादा नुकसान बिजली विभाग को हुआ है। जिले भर के 26 बिजलीघरों के कई क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति रात भर ठप रही। करीब 500 पोल उखड़ गए। 33 केवीए और 11 हजार एचटी की लाइनें टूट गईं। जब आंधी, तूफान थमा तो विद्युत विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए निकल पडे़। देर रात तक शहर की बिजली आपूर्ति को ठीक किया। पुलिस कालोनी में पीपल के पेड़ गिरने से लाइन टूट गई, जिसे रविवार को ठीक किया गया। करसान रोड पर भी दो जगह बिजली लाइन टूटी, जो रविवार को ही ठीक हो सकी। रातभर लोगों को अंधेरे में गुजरना पड़ा।
इसके अलावा आंधी, तूफान से बडे़, बडे़ पेड़ धराशायी हो गए, जिससे कई मार्गों पर यातायात ठप रहा। सुबह प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से पेड़ों को सड़क से हटाया गया तब कहीं जाकर यातायात शुरू हो पाया। कई जगह तो वाहन चालकों ने ही सड़क से पेड़ों को हटाया। एसडीएम कोंच जलराजन चौधरी की मानें तो क्षेत्र में 17 लोगों के घरों के छप्पर आंधी में उड़ गए और विद्युत लाइनें टूट गईं। जन हानि और पशु हानि की कोई घटना नहीं घटी। एसडीएम कालपी धीरेंद्र कुमार के मुताबिक कालपी क्षेत्र में भी आंधी और तूफान से पेड़ और विद्युत पोल गिरे हैं। एसडीएम माधौगढ़ एसपी गुप्ता ने कहा कि उन्होंने जांच के लिए टीमें लगा दी हैं। 24 घंटे बीतने के बाद भी अभी तक उनके पास क्षेत्र में आंधी, तूफान से होने वाले नुकसान की कोई जानकारी नहीं है। सदर एसडीएम आनंद कुमार शुक्ला ने भी माना कि आंधी, तूफान से क्षेत्र में कई पेड़ और बिजली के तार टूटे हैं। लेखपाल और कानूनगो को गांव-गांव की रिपोर्ट लेने के लिए लगाया गया है।
जिले में शनिवार की शाम लोग गर्मी से बेहाल थे तो बादलों से उन्हें कुछ राहत मिली, लेकिन आठ बजे आंधी तूफान के सार्थ आई बारिश ने कहर बरपा दिया। बोहदपुरा में तो आंधी, तूफान और पानी के साथ ओले भी गिरे, जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए, उन्हें ऐसे मौसम का कतई अंदाजा नहीं था।
बोले जिम्मेदार
विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता गिरीश कुमार ने बताया कि पूरे जिले से जो सूचना प्राप्त हुई है, उसके अनुसार पांच सौ पोल डैमेज हुए हैं। करीब 25 लाख का नुकसान विभाग को हुआ है। रात से ही विभाग की टीम विद्युत लाइनों को ठीक करने में लगी है। ग्रामीण अंचल में अभी कुछ जगह विद्युत लाइनें ठीक नहीं हो पाईं हैं। सोमवार तक सभी लाइनें दुरुस्त हो जाएंगी और विद्युत आपूर्ति सुचारु होने लगेगी।
ढाबा जमींदोज, मलबे में दबकर मजदूर की मौत
कुठोंद (जालौन)। शनिवार की शाम आंधी-तूफान के दौरान औरैया मार्ग पर फौजी ढाबा ढह गया। इसके मलबे में दबकर एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। चिकित्सालय में उपचार के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई। ढाबा संचालक भी दाने-दाने को मोहताज हो गया है।
कस्बा कुठौंद के औरैया रोड़ पर गोबिन्द श्रीवास्तव का फौजी ढाबा है। उस पर औरैया के सहबदा गांव निवासी भैयालाल (55) मजदूरी करता था। शनिवार की देर शाम तूफान से ढाबा ढह गया। मलबे में दबकर भैयालाल गंभीर रूप से घायल हो गया। अन्य मजदूरों ने उसे मलबे से बाहर निकाला। होटल संचालक उसे औरैया जिला चिकित्सालय ले गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। ढाबा मालिक गोबिन्द ने भैयालाल के परिजनों को सूचना दी। बदहवास परिजन चिकित्सालय आए और होनी पर रोने लगे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। होटल संचालक का लाखों का नुकसान बताया जा रहा है। इसके अलावा भी कुठोंद क्षेत्र में कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए।
राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत
जालौन। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पनहरा में शनिवार की देर शाम आई आंधी आने से पीपल का पेड़ गिर जाने से पेड़ के नीचे बैठे राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई। ग्राम प्रधान संजीव सिंह गुर्जर मृत मोर को लेकर पशु चिकित्सालय आए, जहां डा. आर.एन चौधरी ने पोस्टमार्टम कर क्षेत्रीय वन अधिकारी आर.एस. चौरसिया को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारी आए और राष्ट्रीय पक्षी को सम्मान के साथ दफना दिया।
ओलों से मर गईं हजारों मछलियां
जालौन। शनिवार की शाम तेज हवाओं के साथ ओला व पानी बरसने से मुहल्ला मुरली मनोहर बड़ी माता मंदिर के पीछे बने पक्के तालाब में पलीं हजारों मछली मर गईं। ठेकेदार ने इन्हें मेटाडोर व ट्रैक्टर ट्राली में लादकर नगर के बाहर फिंकवाया। ठेकेदार अंसार एवं मुहम्मद समीम ने दो लाख रुपये का नुकसान बताया है। अभी भी तमाम मछलियां किनारों तथा पानी की सतह पर दिख रही हैं, जिसे तालाब के नजदीक रहने वाले मुहल्लेवासी उठा ले जा रहे हैं।
मुआवजे के लिए हर तहसील को पांच-पांच लाख
उरई। जिलाधिकारी रामगणेश ने बताया कि आंधी, तूफान से हुए नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। शासनादेश के अनुसार जिनका जो नुकसान हुआ है, उनको राहत दी जाएगी। प्रत्येक तहसील क्षेत्र के लिए पांच-पांच लाख रुपये आवंटित कर दिया गया है। तहसीलदार, एसडीएम रिपोर्ट के आधार पर राहत देंगे। इसके बाद भी कोई बड़ी राहत है तो उसके लिए बजट है और कोई भी पीड़ित ऐसा नहीं बचेगा, जिसे राहत न दी जाए। उन्होंने बताया कि फिलहाल जनहानि की अभी तक कोई सूचना नहीं है। किसी की मौत होती है तो उसके परिजनों को डेढ़ लाख रुपया दिया जाएगा और पशुओं की मौत पर अलग-अलग मुआवजे का प्रावधान है।