उरई (जालौन)। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान का पार्थिव शरीर गुरुवार को जैसे ही गांव लाया गया, लोगों में दुख की लहर दौड़ गई। लोगों की आंखों में आंसू थे, साथ ही आतंकियों से लोहा लेने वाले गांव के ‘लाल’ की बहादुरी पर गर्व भी था। परिजनों की चीख-पुकार के बीच शहीद के शव को तिरंगे में लपेटकर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने भी जवान को पुष्प अर्पित किए। अंतिम यात्रा के दौरान- कौशल किशोर अमर रहे, के नारों से पूरा गांव गूंज उठा। सीआरपीएफ की टुकड़ी ने भी गार्ड आफ आनर के साथ अपने साथी को अंतिम सलामी दी। बडे़ भाई ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों ने डीएम से शहीद स्मारक व गांव के बाहर शहीद द्वार बनाने की मांग की तो डीएम ने चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर चुनाव आयोग से अनुमति लेने की बात कही।
सोमवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा में मजदूरों की सुरक्षा में लगे जवानों पर तकरीबन 200 नक्सलियों ने हमला बोला था। इसमें 14 जवान शहीद हुए थे। इनमें जालौन कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पनहरा का जवान कौशल किशोर भी है। गुरुवार को सीआरपीएफ के डीआईजी दिनेश अन्याल, डिप्टी कमांडर अभीचंद्र यादव जवान का शव लेकर जैसे ही शहीद के घर पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया। रिश्तेदार व ग्रामीण, जवान के अंतिम दर्शन को उमड़ पडे़। जवान का चेहरा खोला गया तो नक्सलियों की क्रूरता देख ग्रामीणों के दिल दहल गए। पत्नी, पैरों के निशान से पति का शव पहचान सकी। डीएम रामगणेश, एसपी राकेश शंकर, सीओ उरई ओमप्रकाश सिंह, कोतवाल नसीम खान, सीओ माधौगढ़ मनोज गुप्ता ने पुष्पचक्र अर्पित किया। सपा सांसद घनश्याम अनुरागी, पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, विधायक दयाशंकर वर्मा, जयशंकर द्विवेदी, बसपा सांसद बृजलाल खाबरी, कांग्रेस के कालपी विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह सरसेला भी शहीद के अंतिम दर्शन को पहुंचे। बडे़ भाई ब्रहमकिशोर ने मुखाग्नि दी। इस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद रहे।