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शोक में डूबा जालौन का पनयारा गांव

Thu, 13 Mar 2014 05:31 AM IST
Jalaun
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जालौन। छत्तीसगढ़ के सुकमा में मंगलवार को नक्सलियों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों में जालौन के पनयारा गांव के कौशल किशोर (32) का भी नाम है। कौशल के शहीद होने की खबर मिलते ही समूचा गांव शोक में डूब गया। परिजन रोने बिलखने लगे। बूढ़ी मां, पत्नी व भाई फूट-फूट कर रोने लगे। बडे़ भाइयों को भाई की शहादत पर फर्क है, वही वह इसे सरकार की नाकामी भी मान रहे हैं। भाइयों का कहना है कि नेता ही नक्सलियों व आतंकियों को बढ़ावा देते हैं। उधर, जानकारी मिली है कि बुधवार को देर रात तक शहीद का शव गांव पहुंच जाएगा और गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।
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जालौन कोतवाली क्षेत्र के गांव पनयारा में बुधवार को शहीद कौशल किशोर (32) के घर पर ग्रामीणों का जमावड़ा लगा था। घर के अंदर से रोने बिलखने की आ रही आवाजें सुन लोगों की आंख नम हो गई। शहीद के बडे़ भाई रामनरेश ने बताया कि उनके पिता बाबूराम की 20 वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। उन्होंने खेती व मेहनत मजदूरी कर अपने दो छोटे भाई रमेश चंद्र व शहीद कौशल किशोर को पढ़ाया लिखाया। रमेश चंद्र उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर बांदा में तैनात है। कौशल किशोर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में तैनात थे। मंगलवार को वह तोंगपाल व जीरम घाटी के बीच सड़क निर्माण कार्य कर रहे मजदूरों की सुरक्षा कर रहे थे तभी नक्सलियों ने घात लगाकर मौत के घाट उतार दिया। उन्होेंने बताया कि उन्होंने समाचार टीवी पर देखा तो चिंता बढ़ गई। रात में कमांडेंट का फोन आया तब उन्हें भाई की शहादत की जानकारी हुई। उन्होंने बताया कि शहादत का तो गर्व है लेकिन सरकारों की ढुलमुल रवैया से ही जवान शहीद हो रहे है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई छेड़कर उनका सफाया करना चाहिए ताकि बेवजह किसी जवान की जान ना जाए। उन्होंने बताया कि देर रात तक पार्थिव शरीर गांव आएगा। भाई ने बताया कि कौशल किशोर 18 फरवरी को घर से वापस गया था। क्या पता था कि अब वह कभी लौट कर नहीं आएगा।
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