उरई। जिले में 29 अप्रैल को मतदान होना है लेकिन किसी भी पार्टी के नेता ने पानी को मुद्दा बनाना उचित नहीं समझा। वोट सिर्फ बिरादरी और बड़े नेताओं के चेहरे और नाम पर ही मांगे जा रहे हैं। पानी का संकट क्यों और कब से है, कोई दावेदार पूछ तक नहीं रहा है। यही कारण है कि पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। गर्मी के दस्तक देेते ही जिले में पेयजल का संकट शुरू हो गया है। लोग विकास के वादों के बीच सिर पर पानी ढ़ोने को मजबूर है, लेकिन गांव की इन प्रमुख समस्याओं को कोई भी दल उठाने को तैयार नहीं, अभी भी गांव के लोगों को पीने के पानी के लिए काफी दूर तक जाना पड़ रहा है।
नदी से पानी लाना बना मजबूरी
उरई। कई चुनाव आए और गए, हर चुनाव में कोटरा क्षेत्र के ग्रामीणों को सिर्फ एक ही बात सुनने को मिली कि जल्द ही नदी से पानी भरकर लाने की उनकी समस्या को दूर कर दिया जाएगा। कई वादों पर जनता ने विश्वास भी किया और वादा करने वाले प्रत्याशियों को संसद तक पहुंचाया, लेकिन क्षेत्र में पानी का संकट जस का तस है। स्थिति यह है कि अभी से ही कस्बे के कई मोहल्लों के लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। इतना ही नहीं कोटरा कस्बे में लगे हैंडपंप पिछले कई महीनों से खराब पड़े है। कई शिकायतों के बाद भी इन्हें ठीक नहीं किया गया। हालत यह है कि कस्बा के मोहल्ला मुजफ्फर नगर, नारेघाट, मंडीबाजार आदि क्षेत्र में लोगों को पीने के पानी की संकट से लोगों को जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नेता वोट मांगने तो आ रहे हैं लेकिन पेयजल समस्या सिर्फ देखेंगे कहकर चले जाते हैं।
पीने के पानी के लिए भटक रहे बाशिंदे
कदौरा। चुनाव का समय है कई नेता क्षेत्र में आकर विकास की बातें कर रहे हैं लेकिन कस्बे में व्याप्त पानी संकट के मुद्दे को कोई नहीं उठा रहा है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में गर्मी शुरू होते ही पानी का संकट गहराने लगा है। नगर के मोहल्ला इस्लामाबाद, सिद्धार्थ नगर, पुरवा मोहल्ला में गर्मी शुरू होते ही पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। स्थिति यह है कि अभी से मोहल्ले के आधे से ज्यादा हैंडपंप पानी देना बंद कर चुके हैं। कई बार नगर के बाशिंदे इन खराब हैंडपंपों को ठीक कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली। नगर के धर्मेंद्र द्विवेदी, सुनील कुमार, यासीन बाबा, छोटे यादव आदि का कहना है कि हर साल इन मोहल्लों में पीने के पानी का संकट बना रहता है, लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी न तो जिला प्रशासन और न ही जन प्रतिनिधि इस ओर ध्यान देते है।