उरई। आठ साल पहले किशोरी के अपहरण करने के मामले में दोष सिद्ध होने पर न्यायाधीश ने बीस साल की सजा सुनाई और चालीस हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने सात जून 2016 को तहरीर देकर बताया था कि 31 मई 2016 को गांव का ही नफीस उनकी नाबालिग बेटी को अपहरण कर ले गया है। पुलिस ने अपहरण सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। पुलिस ने 11 नवंबर 2016 को नफीस को किशोरी संग पकड़ लिया था। पुलिस ने किशोरी के कलम बंद बयान मजिस्ट्रेट के सामने कराए। जहां किशोरी ने दुष्कर्म की बात कही थी।
तब पुलिस ने दुष्कर्म की धारा बढ़ाकर आरोपी को जेल भेज दिया थ और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। जिसका ट्रायल पॉस्को एक्ट कोर्ट में चल रहा था।
गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान व सबूतों के आधार विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहमद कमर ने नफीस को दोषी पाते हुए बीस साल की सजा सुनाई और चालीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को देने के आदेश दिए।