ऊमरी (जालौन)। लॉकडाउन में जब काम-धंधा बंद हो गया तो दो दोस्तों ने हैदराबाद से साइकिल के सहारे घर पहुंचने की ठानी। 28 दिन में 1700 किमी की दूरी तय कर आखिर में अपने गृह जनपद जालौन पहुंचे पर साइकिल के पैडल मारते-मारते दोनों के पैरों में छाले पड़ आए और जांघें भी सूज गई हैं। फिर भी हिम्मत नहीं हारी।
रामपुरा ब्लाक के गांव टीहर निवासी विजय कुशवाह और सिद्धपुरा गांव के संतोष बताते हैं कि वे दोनों आंध्र प्रदेश के सिंकदराबाद में पुताई का काम करते थे। रोज कमाना और रोज का खाना था। लॉकडाउन होते ही सड़कों और गलियों में सन्नाटा पसर गया, फिर पुताई कराने की कौन सोचता। इसलिए काम धंधा पूरी तरह से बंद हो गया। कुछ दिन तो जैसे-तैसे काम चलाया पर जब जमा पूंजी समाप्त होने लगी तो हालात की गंभीरता भांपकर हम लोगों ने फैसला किया और जो कुछ जरूरी सामान था। उसे साथ लेकर अपनी साइकिल से जालौन पहुंचने का फैसला किया। पूरी तरह तो याद नहीं कब चले थे, रास्ते की भूख प्यास और तकलीफ ने मानो सब कुछ भुला सा दिया हो पर 27-28 दिन जरूर हो गए होंगे। अब तो बस जैसे तैसे घर पहुंच जाएं, यही इच्छा बाकी है। कस्बा ऊमरी में ग्रामीणों ने उन्हें खाना खिलाया। इसके बाद दोनों फिर अपने गांवों की ओर चल दिए।