उरई। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने व मुफ्त यात्रा करने वालों पर प्रशासन पर शिकंजा कसने जा रहा है। डीएम ने फर्जी दिव्यांगों को चिह्नित करने के सीएमओ को निर्देश दिए है। निर्देश मिलते ही सीएमओ ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है। वहीं संदेहास्पद प्रमाणपत्रों का वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। सूत्रों की माने तो कई प्रमाणपत्र सामने आए है, जिन्हें विभाग जल्द ही नोटिस थमाकर उनसे दिव्यांग होने के सबूत (डॉक्टरी रिपोर्ट) मांगा जाएगा।
कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से बड़ी संख्या में लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवा लिए है, जबकि उनका स्वास्थ्य विभाग में कोई रिकार्ड नहीं है। जबसे ऑनलाइन डाटा शुरू हुआ है, तबसे ऐसे मामले पकड़े जा रहे है।
स्वास्थ्य विभाग और दिव्यांग कल्याण विभाग के ऑनलाइन डाटा में अलग अलग आंकड़े को जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने पकड़ा है और उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तत्काल मामले की जांच की जाए और फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। तत्काल फर्जी प्रमाणपत्र के मामले की खोज की गई। फिलहाल दो दर्जन ऐसे दिव्यांग मिले है, जिनका स्वास्थ्य महकमे के रिकार्ड में कोई लेखाजोखा नहीं है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे है कि वे एक हफ्ते के अंदर अपनी दिव्यांगता का सबूत दें। अन्यथा उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल डॉ. सुग्रीव बाबू को जांच सौंपी गई है।
आनलाइन के बाद थमा है फर्जीवाड़ा
सीएमओ डॉ. अल्पना बरतारिया कहती है कि पहले मैनुअल प्रमाणपत्र बनते थे। लेकिन वर्ष 2016 से ऑनलाइन प्रमाणपत्र बनने लगे। अब हर सोमवार को हड्डी रोग विशेषज्ञ,नेत्र रोग विशेषज्ञ और कान, कान गला रोग विशेषज्ञ का पैनल बैठकर दिव्यांगता की जांच कर प्रमाणपत्र पर रिपोर्ट लगाता है। इसके बाद दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए जाते है। ऑनलाइन के बाद फर्जीवाड़ा थमा है।
कई कारणों से निरस्त हो जाते हैं आवेदन
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आवेदक को ऑनलाइन ही चिकित्सकों के पैनल के सामने पेश होने की तारीख आवंटित की जाती है। ऐसे में उन लोगों के आवेदन निरस्त कर दिए जाते है जो पैनल के सामने पेश नहीं होते हैं या दिव्यांगता की श्रेणी में नहीं आते है, एक्सरे व जांच रिपोर्ट नहीं होती है, आवेदन में त्रुटि होती है या जांच के लिए बाहर रेफर किया जाता है तो ऐसे आवेदन को आनलाइन में टिप्पणी के साथ निरस्त कर दिया जाता है।