कदौरा। हैंडपंप खराब होने ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन अफसर हैं कि ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। जो हैंडपंप चालू हैं, उन पर पानी भरने के लिए लाइन लग रही है। जो खराब हैं, उनमें ग्रामीण मवेशी बांध रहे हैं।
गर्मी की शुरुआत में ही डीएम ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पेयजल की समस्या से निपटने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे, जिससे लोगों को परेशानी न हो। इसके बाद भी ब्लॉक कार्यालय और गांवों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई गांवों में हैंडपंप खराब हैं। ग्रामीण पानी की किल्लत से परेशान हैं।
ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम इकौना में 20 हैंडपंप लगे हैं। इनमें 16 हैंडपंप खराब हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव के चार हैंडपंप ही पानी दे रहे हैं। जो हैंडपंप सही हैं, उन पर पानी भरने के लिए सुबह से ही मारामारी मच जाती है। रैला गांव में 27 हैंडपंप लगे हैं। इसमे 13 हैंडपंप खराब हैं। तीन हैंडपंप कम पानी दे रहे हैं। जो हैंडपंप खराब हैं, ग्रामीण उनमें मवेशी बांध रहे हैं।
रामकली, मनीषा, गुड़िया, काजल, किरण ने बताया कि पानी भरने के लिए उनको दूसरे मोहल्लों में जाना पड़ता है। कई बार शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। बीडीओ बृजकिशोर कुशवाहा ने कहा कि संबंधित सचिवों को मौके पर भेजा जा रहा है। जल्द समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा।
कागजों में पानी दे रही पाइप लाइन
रैला निवासी विज्ञान सिंह पाल ने बताया कि हर घर जल योजना के तहत पाइप लाइन डाली गई है। अधिकारी कागजों में पाइप लाइन को चालू दिखा रहे है, जबकि गांव में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। गांव में पानी की किल्लत है। सुबह-शाम हैंडपंप पर भीड़ रहती है।
शिकायत के बाद भी नहीं दे रहे ध्यान
रैला के ही श्रीराम धानुक के मुताबिक खराब हैंडपंपों की शिकायत कई बार की गई, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हैंडपंप मरम्मत के नाम पर धनराशि निकाल कर बंदरबांट किया जा रहा है। इनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।
ट्रैक्टर-बैलगाड़ी से लाना पड़ता है पानी
इकौना के जयकरन सिंह का कहना है कि मुख्यालय से गांव की दूरी करीब 15 किमी है। गांव में पानी की समस्या विकराल है। अधिकतर हैंडपंप खराब हैं। लोग ट्रैक्टरों और बैलगाड़ी से पानी दूसरी जगह से भरकर लाते हैं। शिकायत के बाद भी अधिकारी नहीं ध्यान दे रहे हैं।
लंबे समय से है गांव में पानी की समस्या
इकौना गांव के सत्य सिंह कहते हैं बीहड़ क्षेत्र होने के कारण अधिकारी भी गांव में नही आते हैं। यह समस्या लंबे समय से है। कई बार शिकायत करने के बाद भी पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव के लोग पशुओं को पानी पिलाने के लिए नदी में ले जाते हैं।
रैला गांव में अपनी बारी का इंतजार करते ग्रामीण।- फोटो : ORAI