जालौन। 18 वर्ष से काम न मिलने के कारण सीजनल अमीन घर पर बैठे हैं। जिसके कारण वह भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। सीजनल अमीनों ने चुनाव के समय में नौकरी पाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। उन्होंने अपनी मांग मनवाने के लिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा है।
राजस्व विभाग ने राजस्व वसूली के लिए 1989 में सीजनल अमीनों की नियुक्ति की थी। इन अमीनों ने मेहनत कर सरकार का राजस्व वसूल कर खजाने को भरा था। सरकार ने अधिकांश सीजनल अमीनों को स्थायी कर दिया है। किंतु तहसील में अभी भी 10 सीजनल अमीन ऐसे हैं। जिन्हें अभी तक सरकार ने स्थायी नियुक्त नहीं दी है।
स्थायी नियुक्ति न होने के कारण कभी सरकारी अमीन रहे सीजनल अमीन आज भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। सीजनल राजस्व संग्रह अमीनों ने एक मांग पत्र मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को भेजा है। जिसमें कहा गया कि एसीआरए जयंत तिवारी, सीआरए ब्रजेश कुमार लगातार प्रशासन व शासन को गुमराह कर रहे हैं। सीजनल अमीनों ने उक्त अधिकारियों पर शासन व प्रशासन को गुमराह कर अपने निजी स्वार्थों के कारण उन्हें नौकरी से वंचित किए जाने का आरोप लगाया है।
स्थायी नौकरी से वंचित तहसील के सीजनल अमीन नारायणदास द्विवेदी, अरुण कुमार चतुर्वेदी, उमाकांत श्रीवास्तव, जगमोहन यादव, अशोक श्रीवास्तव, ज्ञान सिंह यादव, गेंदालाल कुशवाहा, महिपाल सिंह पाल, चंद्रपाल सिंह बताते हैं कि 1989 में उन्हें सीजनल अमीन के पद पर नियुक्त किया गया था। चार फसली वसूली के साथ उन्होंने 2001 तक राजस्व वसूली की थी। उनके अन्य सभी साथियों को स्थायी नियुक्ति मिल चुकी है। किं तु हम लोगों को भ्रष्ट कार्यप्रणाली के कारण आज तक स्थायी नियुक्त नहीं मिल सकी है। जिसके कारण वह भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। लोकसभा चुनाव के पूर्व नौकरी दिलाए जाने के लिए सीजनल अमीनों ने मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।