उरई। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के मीटिंग हाल में सुपोषण को लेकर कार्यशाला हुई। इसमें बाल विकास विभाग की सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं को गर्भवती महिलाओं व बच्चों में कुपोषण रोकने व एनीमिया की कमी के स्तर को ऊंचा उठाने पर विचार विमर्श किया गया।
भारत सरकार के स्वस्थ भारत प्रेरक वेदप्रकाश सिंह ने बताया कि कुपोषित बच्चों व महिलाओं की संख्या की संख्या को कम करने के लिए प्रयास किए जाने हैं, इसके लिए खाद्य एवं रसद विभाग, मनरेगा, बाल विकास विभाग, शिक्षा, स्वास्थ्य व पंचायती राज जैसे विभागों में समन्वय बनाकर कार्य किया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में 130 गांव कुपोषित की श्रेणी में थे।
जिन्हें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने गोद लिया था। अब उन गांवों को सुपोषित बनाया जाएगा। इसके लिए लगातार अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चों की तीन श्रेणी बनाई गई है। उनमें हरी श्रेणी के बच्चे सामान्य, पीली श्रेणी के कुपोषित व लाल श्रेणी के अति कुपोषित होते है।
लाल व पीली श्रेणी के बच्चों को उनके वजन के अनुसार कुपोषित किया जाना है। इस दौरान शहर सीडीपीओ विमलेश आर्या, जालौन सीडीपीओ अंकिता वर्मा, कपिल शर्मा, गीता वर्मा, नदीगांव व कोंच की सीडीपीओ वंदना वर्मा, उर्मिला, डकोर की अंजली अग्रवाल, कदौरा की गोमती देवी, रामपुरा की सीमा निगम के अलावा मुख्य सेविकाएं भी मौजूद थीं।