आईएसआई के पाले हुए दहशतगर्दों की जड़ें वेस्ट यूपी में गहरी हैं। बीते दो दशक में आधा दर्जन पाक आतंकियों की गिरफ्तारी से यह साफ हो चुका है। नकली नोट, हथियारों की तस्करी और मादक पदार्थों का कारोबार आईएसआई के इशारे पर इस इलाके में भी फैला है। जकारिया, मोहम्मद वारस जैसे पाक आतंकी जिले में कानून की गिरफ्त में आ चुके हैं। खुफिया एजेंसी आतंक से जुड़े पुराने मामलों की जड़ें खंगालने में जुटी है।
आईएसआई ने नब्बे के दशक में ही वेस्ट में अपना जाल फैला दिया था। कैराना के गठरी कारोबार के जरिए नकली नोटों की खेप लाने का धंधा शुरू हुआ। यहां से पान पाकिस्तान जाते थे, उधर से गठरियों में नकली नोट आने लगे। बीच-बीच में मजहबी नफरत फैलाकर आतंकियों ने युवाओं को बहकाने की कोशिशें की। पुलिस फाइलों में यह घटनाएं दर्ज हैं।
पाक आतंकी जकारिया वर्ष 1999 में मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर जानसठ के मेहलकी गांव में एक घर से पाकिस्तानी निर्मित हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ था। जेल से छूटने के बाद जकारिया फिर पाक भाग गया। मेहलकी के जिस घर में हैंड ग्रेनेड मिला, उस युवक को भी बाद में मोदीनगर बम ब्लास्ट के मामले में पकड़ा गया। उसी का एक भाई आसाम में आतंकी गतिविधियों में कानून के शिकंजे में आया।
इन दिनों दोनों जमानत पर हैं। वर्ष 2002 में बुढ़ाना के जौला में हथियार मिले, जिन्हें पाकिस्तान से लाया गया था। इस मामले में पाक आतंकी मोहम्मद वारस को दबोचा गया था। कैराना के इकबाल काना और दिलशाद भी फिलहाल लाहौर में हैं। यह आतंकी आईएसआई के इशारे पर नकली नोट, हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी के धंधे से जुड़े हैं।
कई बार यह तथ्य सामने आ चुके हैं कि आईएसआई पाक अधिकृत कश्मीर के कैंपों में कुछ युवकों को भटका कर दहशतगर्दी की ट्रेनिंग दे चुकी है। वेस्ट में दंगे के बाद खुफिया एजेंसियां आतंक से जुड़े पुराने मामलों की जड़ें खंगालने में जुटी हैं।
आतंकियों के बना दिए गए थे डीएल
एसटीएफ ने वर्ष 2001 में लखनऊ में दो आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उनके ड्राइविंग लाइसेंस मुजफ्फरनगर एआरटीओ कार्यालय से बनाए गए थे।
बाद में छानबीन में खुलासा हुआ कि फर्जी आईडी के जरिए दलालों की मिलीभगत से आतंकियों ने न केवल डीएल बनवाए बल्कि फर्जी राशन कार्ड भी हासिल कर लिए थे।