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पर्यावरण प्रबंधन में भी माहिर आईआईएम के दिग्गज

Sat, 29 Jun 2013 05:49 PM IST
लखनऊ/आशीष त्रिवेदी
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कुशल प्रबंधक तैयार करने वाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), लखनऊ पर्यावरण प्रबंधन की अनूठी पाठशाला की भी मिसाल बन चुका है। बात चाहे जल-ऊर्जा संरक्षण की हो या फिर हरियाली को विस्तार देने की, यहां पर्यावरण के हित में जरूरी सारी कोशिशें की जा रही हैं।
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कर्मचारी भी दे रहे नसीहत
अनुशासन ऐसा कि कोई भी पर्यावरण से छेड़छाड़ की हिम्मत नहीं जुटा पाता। इसके लिए कर्मचारी भी ‘बड़ों’ को चेतावनी देने के लिए अधिकृत हैं। 200 एकड़ के परिसर में दिखने वाली हरियाली यहां के शिक्षकों-कर्मचारियों की मेहनत का नतीजा है और यह सब संभव हो रहा है मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कर्नल आरके जायसवाल के नेतृत्व में।

परिसर में खुद का सीवेज प्लांट
कर्नल जायसवाल बताते हैं कि परिसर में खुद का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है और इसकी मदद से पानी को साफ किया जाता है। फिर उसी पानी से पेड़-पौधों की सिंचाई की जाती है। पानी की एक-एक बूंद बचाने के साथ ही परिसर की बिल्डिंग में छह पिट हैं और इससे बेहतर ढंग से वर्षा के जल को बचाया जाता है।
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इतना ही नहीं भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े विशेष तालाब बनाए गए हैं। बख्शी का तालाब से लेकर गोमती तक गए नाले को चेक डैम बनाकर पानी का बेहतर प्रयोग किया जा रहा है।

ग्रीन बिल्डिंग में कम रहता है तापमान
ऊर्जा संरक्षण के लिए ज्यादा बिजली की खपत वाले उपकरण हटा दिए गए हैं। परिसर के सभी कमरों की खिड़कियों में ऐसे कांच लगाए गए हैं, जो धूप की तपिश को 50 प्रतिशत तक कम कर देते हैं और पूरी रोशनी अंदर आने देते हैं। दीवारों पर इंसुलेशन किया गया है, ताकि सूर्य की तपिश अंदर कम आए।

नारियल की जटा रोकती है भीषण गर्मी
यहां दो बिल्डिंग को ग्रीन बिल्डिंग बनाया गया है। इसमें गर्मी में बाहर के तापमान की अपेक्षा अंदर पांच से सात डिग्री सेल्यियस तापमान कम रहता है। छत पर नारियल की जटा से क्वायर लॉन बनाया गया है। इसे केरल के क्वायर बोर्ड ने तैयार किया है। नारियल की जटा पानी की नमी को मिट्टी की अपेक्षा पांच गुना अधिक रोकती है। इस क्वायर लॉन में घास उगाई गई है। यहां इमली, गूलर, नीम, पीपल, बरगद और महुआ के पेड़ लगाए गए हैं। ये वृक्ष अन्य की अपेक्षा दस गुना ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं।

कूड़ा प्रबंधन की अनूठी कवायद
अभी सीवर के पानी को साफकर उसका इस्तेमाल सिंचाई में हो रहा है। टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर पानी को और साफ करने की योजना है। फिर इस पानी का इस्तेमाल हॉस्टल के टॉयलेट्स की सफाई में किया जाएगा। संस्थान कूड़ा प्रबंधन में भी भली-भांति जुटा है। परिसर में रहने वाले शिक्षक-कर्मचारी व छात्रों को दो-दो डस्टबिन दिए गए हैं। एक ठोस अपशिष्ट के लिए दूसरा पेड़ों से गिरने वाली पत्तियों व टहनियों के लिए। कूड़े से खाद और ईंटें तैयार की जाती हैं।
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