तकरीबन सात साल पहले चेन्नई के आईआईटीयंस ने 'सेव इंडियन फैमली फाउंडेशन' और 'सेव इंडियन फैमली डॉट ओआरजी' वेबसाइट बनाते समय सोचा भी नहीं होगा कि उनकी तरह दुनिया में हजारों पति अपनी पत्नी और ससुराल के जुल्मों से पीडि़त होंगे..। यह साइट किसी उपन्यास की कहानी नहीं है।
बल्कि वेबसाइट बनाने वाले उस आईआईटीयंस समेत उन तीन हजार चौंतीस पतियों की दर्द भरी दास्तान है जो आज इस फाउंडेशन का हिस्सा बन चुके हैं और आईपीसी की धारा 498ए के दुरुपयोग का खेल बयां कर रहे हैं।
बनाई गई 'पति परिवार कल्याण समिति'
इस वेबसाइट के चलते लखनऊ में 'पति परिवार कल्याण समिति' की स्थापना भी हो चुकी है। यह समिति दहेज का मुकदमा दर्ज कराने वाली पत्नियों से दुखी पति और उसके परिवार के दुखड़े सुनती है। इस समिति को इसी नाम से नेट पर सर्च किया जा सकता है।
दर्ज कराइये अपनी शिकायत, फ्री मिलेगी सलाह
इसे सर्च करने के लिए आपको गूगल में जाकर www.498A.org साइट खोलनी होगी। जहां आपको 'फाइट अगेंस्ट 498ए मिसयूज्ड, गेट फ्री एडवाइस' के साथ कई साइट ग्रुप मिल जाएंगे।
यहां 'हेल्प' कॉलम में कोई भी पीड़ित व्यक्ति (जिसका केस चल रहा हो, केस जीत गया हो, केस हार गया हो) अपना नाम, ईमेल, लोकेशन, पता, केस की स्थिति, तिथि, केस का ब्योरा दर्ज कराके फ्री सलाह ले सकता है।
हेल्प लाइन में यूएसए, कनाडा, कुवैत, भोपाल, मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, कानपुर-यूपी, कोलकाता, बंगलूरू समेत विभिन्न शहरों के नंबर हैं।
इतना ही नहीं आप चाहें तो 'विक्टम स्टोरी कॉलम' में अपनी आपबीती लिख भी सकते हैं और अपने प्रताड़ित होने के वीडियो भी भेज सकते हैं। इस कॉलम में 100 से अधिक पुरुषों की आपबीती भी पढ़ी जा सकती है।
कर सकते हैं मानहानि का दावा
वकील हिमांशु निगम बताते हैं पीडि़त पुरुष चाहे तो आम 'शिकायत के तहत' केस झूठा साबित होने पर पत्नी और ससुराल पक्ष के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 182 के तहत झूठा केस दाखिल करने के आरोप में केस भी फाइल कर सकता है और आईपीसी की धारा 500 के तहत मानहानि का मुकदमा भी ठोंक सकता है। आप चाहें तो जिला प्रोबेशन में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
चार साल पहले शहर की प्रोबेशनरी कानपुर नगर में ऐसे 15 मामले दर्ज हुए थे। सभी मामले पुरुषों द्वारा दहेज और उत्पीडऩ के मुकदमों के बाद दर्ज कराए गए हैं। यहां इन केसों में कार्यवाही ठीक उसी तरह होती है जैसे लड़की द्वारा लिखाई शिकायत में की जाती है।
मामलों में लड़की पक्ष को सम्मन भेज कर बुलाया जाता है। चूंकि पुरुषों के लिए अभी तक इस तरह का कोई विशेष अधिनियम या कानून नहीं है। प्रोबेशनरी के केस में महिलाएं पति द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट पर अक्सर सुलह के लिए राजी हो जाती हैं।