कुंडा के सीओ जियाउल हक के परिवार से दो सदस्यों (पत्नी और भाई) को नौकरी देने के मामले में अब हाईकोर्ट ने प्रदेश के गृह विभाग से सवाल उठाया है।
प्रमुख सचिव गृह से हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि किस आधार पर उसने सीओ के परिवार से दो लोगों को नियुक्ति देने की सिफारिश राज्य सरकार से की।
प्रमुख सचिव को दस दिन में इसका जवाब देना है। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एपी साही ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता यशवंत सिन्हा से जानना चाहा कि सरकार की अनुकंपा नियुक्ति पर क्या नीति है।
पूर्व में कोर्ट ने प्रमुख सचिव नियुक्ति से इस संबंध में हलफनामा मांगा था। प्रमुख सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि अनुकंपा नियुक्ति नीति 1974 के नियम से संचालित होती है और इसमें मृतक के परिवार से एक ही व्यक्ति को नौकरी देने का नियम है।
याचिका पर अगली सुनवाई 13 मई को होगी। सुल्तानपुर की सीमा देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने पति की मृत्यु पर उनके स्थान पर नौकरी देने की मांग की है, जबकि उसके पति की पहली पत्नी को नियुक्ति दी जा चुकी है।
याचिका में आधार लिया गया कि यदि सीओ के परिवार से दो लोगों को नौकरी दी जा सकती है तो उसे क्यों नहीं।