गर्भवती महिला और नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के संकल्प के साथ ‘हौसला’ अभियान सोमवार को शुरू हुआ।
प्रदेश के सभी जिलों में चलने वाले इस जन जागरुकता अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की।
उन्होंने कहा कि अगर मां और बच्चा स्वस्थ होंगे, तो यूपी भी स्वस्थ होगा। इस अभियान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
नहीं मिलती हैं बेहतर सुविधाएं
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा, प्रदेश में बड़ी तादाद में गरीब रहते हैं। समय से स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने से प्रदेश में प्रति लाख 300 माताओं की मौत हो जाती है, जो कि दुखद है।
तमाम बीमारियों की वजह से पांच साल से कम आयु के हजार में 92 बच्चे जान गंवा देते हैं। इसके पीछे की वजह यह भी है कि लोगों तक इसकी जानकारी ही नहीं पहुंच पाती।
अपनी सरकार को बताया बेहतर
अखिलेश ने कहा कि, 108 एंबुलेंस सेवा से लोगों को सीधे फायदा मिल रहा है। इसके अलावा मां और बच्चे को घर तक पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा जल्द ही शुरू हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की पीठ थपथपाई
मुख्यमंत्री ने नई सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह विभाग पटरी से उतरा हुआ था। मात्र डेढ़ साल में इसे पटरी पर लाने में सफलता मिल गई।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग भी इसी तरह अच्छा काम करेगा। आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के सहयोग से इस अभियान को कामयाबी मिलेगी।
ये रहे कुछ आंकड़े
•1000 में 50 शिशु तो एक महीना भी नहीं जी पाते हैं।
•1000 में 71 नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाती है।
•1,00,000 में 300 महिलाएं मां बनने के दौरान या बाद में दम तोड़ देती हैं।
•62.09 प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव का लाभ उठा रही हैं।
•85.1 प्रतिशत बच्चे (6-35 वर्ष) खून की कमी के शिकार
•47.3 प्रतिशत बच्चों (तीन वर्ष से कम आयु वाले) का वजन सामान्य से कम है।
•17 प्रतिशत बच्चों को ही छह माह तक स्तनपान कराया जाता है।
•49 प्रतिशत किशोरियां खून की कमी की शिकार हैं।
•42.2 प्रतिशत महिलाएं 19 वर्ष की उम्र पूरी करने के पहले ही गर्भवती हो जाती हैं।