विभूतिखंड में पिछले करीब तीन महीने से यहां के बाशिंदों की गुहार को अनसुना कर रहे हयात होटल के प्रबंधन को सब कुछ बिगड़ने के बाद मरहम लगाने का होश आया है।
होटल की नींव के लिए की जा रही खोदाई की वजह से जो भी नुकसान मकानों को हुआ है, उनकी स्थिति दुरुस्त होने तक किराए पर रहने में जो भी खर्च आएगा, वह कंपनी प्रबंधन ने अपनी ओर से देने का एलान किया है।
कंपनी से होगा एग्रीमेंट
इस संबंध में मकान मालिकों का कंपनी के साथ एग्रीमेंट होगा। दूसरी ओर बालू की बोरियों को गड्ढे में डाल कर मिट्टी की कटान रोकने की कोशिश की जा रही है। अब यह सारा काम एलडीए अधिकारियों की देखरेख में किया जा रहा है। फिलहाल जिन लोगों के मकानों को खतरा है, उनको रिश्तेदारों ने शरण दी है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने यहां निर्माण का काम एक कंसलटेंट की सलाह पर ही शुरू किया था, मगर वह सलाह काम न आई।
बेघर कर होश में आया प्रशासन
विभूतिखंड में होटल निर्माण के लिए की जा रही खोदाई से मकानों को हुए नुकसान में सब जिम्मेदार हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन। प्राधिकरण ने आठ बार नोटिस भेज कर अपना काम पूरा किया। पुलिस ने एक हल्की एनसीआर दर्ज कर के। लेकिन जब लोग बेघर हो गए तब जिम्मेदारों को होश आया। आखिरकार प्रशासन ने नुकसान होने के बाद यहां काम रुकवाया। मगर जिनका नुकसान होना था वो तो हो ही गया।
नहीं बच पाएगा सपनों का आशियाना
लोगों का कहना है कि होटल कंपनी जिस तरह से यहां राहत के काम कर रही है, उससे मकान बच सकेंगे। तेज बारिश आते ही मकान ढह जाएंगे। यह सपनों का आशियाना बड़ी मुश्किल से बनाया था, अपने मकान को आंखों के सामने यूं गिरते देखना संभव न होगा। मगर पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन की लापरवाही ने हम लोगों को बेघर कर दिया है।