एक तरफ सीपीएमटी-2013 का रिजल्ट आने के बाद प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के नए सत्र की शुरुआत हो गई है। वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेज अभी तक शिक्षकों की कमी के कारण मान्यता के संकट से जूझ रहे हैं।
ऐसे में प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले 300 छात्रों का भविष्य दांव पर है।
प्रदेश में लखनऊ, गाजीपुर, मुरादाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, इलाहाबाद और कानपुर में राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज हैं। इन सभी पर सत्र 2013-14 में मान्यता का संकट बना हुआ है।
क्या है वजह?
पिछले सत्र में भी आयुष विभाग ने मानक पूरे न होने के कारण इन सभी मेडिकल कॉलेज में नए प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।
हालांकि बाद में एक साल के लिए अस्थायी मान्यता दे दी गई। इस दौरान प्रदेश सरकार मानक तो पूरे नहीं कर पायी, ऊपर से कई वरिष्ठ शिक्षकों के रिटायर होने के कारण इन कॉलेजों पर स्थायी रूप से बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रदेश के सातों राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में प्रतिवर्ष 300 छात्रों का सीपीएमटी के माध्यम से प्रवेश लिया जाता है।
मानक में कटौती फिर भी न सुधरी व्यवस्था
दो साल पहले तक प्रत्येक होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में 15 लेक्चरर, 15 रीडर और 13 प्रोफेसर होने चाहिए थे।
इन मानकों को जब चिकित्सा शिक्षा विभाग पूरा नहीं कर पाया तो केंद्रीय होम्योपैथी परिषद ने 2012-13 में शिक्षकों की संख्या को 24 पर सीमित कर दिया।
एक कॉलेज को मानक पूरा करने के लिए 12 रीडर और 12 लेक्चरर की बाध्यता रख दी गई। इसके बावजूद होम्योपैथी विभाग शिक्षकों का इंतजाम नहीं कर पाया।
संविदा शिक्षकों की फाइल शासन में अटकी
होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रांतीय होम्योपैथी शिक्षक संघ ने संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है।
यह प्रस्ताव अब भी चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मेज पर धूल खा रहा है।
24 की जगह सिर्फ 6 टीचर
राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज गाजीपुर में सिर्फ शिक्षक सिर्फ छह हैं। जबकि नियमानुसार शिक्षकों की संख्या कम से कम 24 होनी चाहिए।
इसी तरह मुरादाबाद के राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में मात्र तीन शिक्षक बचे हैं। एक शिक्षक अभी हाल ही में रिटायर हो गए हैं। इनमें से दो प्रोफेसर और दो रीडर हैं। 2013-14 सत्र में इस कॉलेज में भी प्रवेश पर संकट बना हुआ है।
प्रदेश के लिए मॉडल माने जाने वाले लखनऊ के नेशनल होम्योपैथी मेडिकल कालेज का भी बुरा हाल है। कानपुर होम्योपैथी मेडिकल कालेज में एनॉटमी के शिक्षक के बगैर ही छात्रों को पढ़ाया जा रहा है।