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चीन में बड़े पैमाने पर बन रहे हैं भगवान

Thu, 05 Sep 2013 04:06 AM IST
राकेश वार्ष्णेय
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पिछले 10 साल में चीन ने भारतीय नग, मूंगा-मोती आदि के कारोबार को काफी पीछे छोड़ दिया है। चीन दुनियाभर में भारत से काफी कम मूल्य पर नगों की बिक्री कर रहा है। इसका मुख्य कारण चीन की सरकार का नग व्यापार के प्रति संजीदा होना है।
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यह अनुभव चीन से लौटे पुरदिलनगर निवासी कारोबारी नरेंद्र दीक्षित ने मंगलवार को अमर उजाला से साझा किए। उन्होंने बताया कि चीन में नग का कारखाना लगाना भारत से ज्यादा आसान है।

काफी एडवांस हैं चीन की मशीनें
नरेंद्र बताते हैं कि चीन के यीवू जैसे छोटे शहर में दो हजार दुकान तथा सैकड़ों कारखानों का एक परिसर तैयार किया गया है। इसमें केवल कांच का काम होता है। पूरा निर्माण मशीनों से किया जाता है। हर समय बिजली उपलब्ध है। सरकार कारखाना स्वामियों से केवल किराया वसूलती है।
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टैक्स, बैंक में कारोबार के हिसाब से खुद ही कट जाता है। श्रमिकों को अधिकतम आठ घंटे ही काम करना पड़ता है। मशीनों से बनने वाले नग काफी अच्छी क्वालिटी के होते हैं। भारत में हाथ से बनाए जाने वाले नगों से इसकी लागत काफी कम रहती है।

सरकार करती है काफी मदद
नरेंद्र कहते हैं कि भारत में अगर कोई उद्योग लगाना हो तो उसे सरकारी दफ्तरों में सैकड़ों चक्कर लगाने पड़ेंगे। अधिकारी, नेताओं से संपर्क करना पड़ेगा। इसके बाद भी बिजली आदि की समस्या बनी रहती है। वहां पर यह काम काफी आसान है।

वहां व्यापारी को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद सरकार खुद ही मशीन, कच्चा माल, बिजली आदि की व्यवस्था कराती है। रजिस्ट्रेशन कराने वाले को सरकार कारखाना सौंप देती है और बाद में किराया वसूलती रहती है।

देवी-देवताओं की मूर्तियों की खूब डिमांड
चीन में शंकर, विष्णु भगवान, कन्हैया, लक्ष्मी, दुर्गा आदि देवी-देवताओं की फाइबर और मेटल की मूर्तियां का निर्माण भी बड़े स्तर से हो रहा है। मशीन से बनने वाली इन मूर्तियों की क्वालिटी भी काफी अच्छी है। बाजार में इसकी काफी डिमांड है।
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