यूजीसी के नए नियम और एससी-एसटी एक्ट के विरोध में धरने पर बैठे राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैया से मिलने बृहस्पतिवार को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज पहुंचे। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ हमारे जख्मों पर नमक न लगाएं, बल्कि जख्मों के लिए मरहम खोजें।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह धरने पर बैठे पंकज का समर्थन करने और प्रणाम करने आए हैं। हमें जंतर-मंतर जाना था, लेकिन हमें जाने नहीं दिया गया, इस पर एक डॉक्टर अपने घर के बाहर ही धरने पर बैठ गई थीं। ऐसी ही कुछ कहानी पंकज की है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म के सूर्य हैं। हम ही हैं, जो उनके साथ रहेंगे, हम ही जो उनके साथ में लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि हमारे अलावा कोई और उनके साथ रहने वाला नहीं है। जो भी कट्टर हिंदू हैं, वह उनके साथ रहेंगे। सनातन को मानने वाले लोग यूजीसी के खिलाफ हैं। जो दूसरे लोग हैं, वह मोदी और योगी के साथ न कभी थे और न कभी होंगे।
धरने के दौरान पंकज धवरैया हाथों में मांगों से संबंधित पोस्टर लेकर नारेबाजी करते रहे। छठवें दिन प्रशासन का रुख कुछ नरम नजर आया और धरना स्थल पर उनसे मिलने आने वाले लोगों को जाने दिया गया। दिल्ली से आए समर्थकों ने धरना स्थल पर तिरपाल बांधा और कुछ समय तक वहीं मौजूद रहे।
धरना स्थल कंचन नगर और आसपास के क्षेत्र में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। बृहस्पतिवार को मुख्य तौर पर गाजियाबाद से आए महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज और उनके साथ आईं डॉ. उदिता त्यागी रही के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा।
इनके अलावा विश्व हिंदू परिषद दिल्ली प्रांत के मंगल पांडेय, आरएसपी के गाजियाबाद से मनीष अत्री, अलीगढ़ से रजनी शर्मा, गिरिराज प्रभात मंडल, वीरेंद्र चतुर्वेदी ब्राह्मण महासभा धर्माचार्य, रेखा राना एडवोकेट, आरती भी पहुंचीं और धवरैया से मुलाकात की। राष्ट्रीय परशुराम सेना के अध्यक्ष राजू कौशिक भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। मौके पर प्रशांत शर्मा, ब्रजेश वशिष्ठ, अविनाश पचौरी, ललतेश गुप्ता, मतेंद्र सिंह गहलोत आदि मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल को पीएम से मिलवाएं : धवरैया
राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैया ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें पदयात्रा की अनुमति प्रदान करे या फिर उनके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री से मुलाकात कराई जाए।