सासनी के गांव ऊसवा में गोपालजी की पोशाक बनातीं महिलाएं। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
जन्माष्टमी से पहले सासनी क्षेत्र के गांवों में महिलाओं के हाथों में इन दिनों सुई-धागे के साथ रोजगार भी नजर आ रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं घरों में बैठकर लड्डू गोपाल की रंग-बिरंगी पोशाकें, मुकुट और श्रृंगार सामग्री तैयार कर रही हैं। त्योहार पर बढ़ी मांग से महिलाओं को अतिरिक्त काम मिला है। खास बात यह है कि वे खुद काम करने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
क्षेत्र के उसबा, सठिया, अमरपुर और बांधनू गांवों में यशोदा, सुनीता, ज्योति, विनीता सहित कई महिलाएं इन दिनों पोशाक तैयार करने में जुटी हैं। रंग-बिरंगे कपड़ों पर गोटा-पट्टी, कढ़ाई और अन्य सजावटी सामग्री लगाकर लड्डू गोपाल के लिए आकर्षक पोशाकें तैयार की जा रही हैं। इनके साथ मुकुट, बंसी और अन्य श्रृंगार सामग्री भी बनाई जा रही है।
त्योहार ने बढ़ाया काम : महिलाओं के अनुसार जन्माष्टमी के आसपास लड्डू गोपाल की पोशाक और मुकुट की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसे देखते हुए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पहले से ही पोशाक तैयार करने में जुट गई हैं। तैयार उत्पाद सासनी और हाथरस के बाजारों के अलावा आसपास के कस्बों और जिलों में भी भेजे जा रहे हैं।
एक काम से कई हाथों को रोजगार : पोशाक तैयार करने वाली महिलाएं सिलाई, कटाई और कढ़ाई का काम गांव की दूसरी महिलाओं को भी देती हैं। इससे घर पर रहकर काम करने वाली महिलाओं को भी आमदनी का जरिया मिल रहा है। त्योहार के सीजन में बढ़े काम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय में भी इजाफा हो रहा है। इससे ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी सहयोग कर रही हैं।