सीएचसी महौ में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने की शुरुआती जांच में चार जन्म प्रमाणपत्र फर्जी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नजरें जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी टिक गई हैं। खास बात यह है कि हसायन से भी दो साल पहले विभिन्न प्रदेशों के लिए 2,100 प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। ऐसे में विभाग अब पोर्टल पर संलग्न दस्तावेजों की जांच में जुट गया है।
विस्तृत जांच में सामने आएंगे सैकड़ों प्रमाणपत्र
महौ सीएचसी पर हुई गड़बड़ी की शिकायत के बाद जांच हुई और फिर डिप्टी सीएमओ डॉ. एमआई आलम ने कोतवाली हाथरस जंक्शन में रिपोर्ट दर्ज कराई। इस जांच के लिए रेंडम कुछ प्रमाणपत्र उठाए गए थे, जिनमें से चार फर्जी निकले, जबकि पिछले एक साल में जारी प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच हो तो ऐसे सैकड़ों निकलेंगे। विभाग ने फिलहाल मामला पुलिस के पाले में डाल दिया है। पुलिस बिना स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से विस्तृत जांच नहीं कर सकती, क्योंकि इसमें पोर्टल की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए विभाग को ही जांच कर जानकारी पुलिस को उपलब्ध करानी होगी।
पुराने प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन करने की आड़ में खेल
हाल ही में हुई समीक्षा में लगभग सभी सीएचसी पर जन्म के सापेक्ष 120 से 127 फीसदी तक जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। अब इसके पीछे विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि पुराने जारी जन्म प्रमाणपत्रों को भी ऑनलाइन किया जाता है, जिससे पोर्टल पर डाटा अधिक नजर आता है। इसी आड़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल चल रहा है।
वीडीओ की आईडी से बने थे फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
स्वास्थ्य विभाग के जरिये 30 पंचायतों की आईडी बनवाई गई थीं, जिनमें से हसायन की ग्राम पंचायत सिंचावली सानी के वीडीओ की भी आईडी बनी थी, लेकिन उन्हें यह आईडी तीन अगस्त 2024 को मिली। उससे पहले एक जनवरी 2023 से दो अगस्त 2024 तक इस आईडी से 814 प्रमाणपत्र जारी हो चुके थे, जिनमें छह राज्य और 47 जिले शामिल थे। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई थी। हसायन के नजदीक महौ सीएचसी में सामने आया ताजा मामला भी इसी से मिलता-जुलता हो सकता है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। विभागीय स्तर से भी जांच कराई जा रही है।
-डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ