वादी ने तहरीर में कहा कि उसकी तथा उसके पुत्र की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। उसने जानकारी कर ली है उसे पूरा विश्वास है कि उसके पुत्र पवन कुमार की हत्या उसकी पत्नी रेखा, ससुर राम प्रकाश शर्मा व सास ने मिलकर गला दबाकर की है। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
हाथरस के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 2 त्रिलोकपाल सिंह के न्यायालय ने महिला शिक्षामित्र को पति की हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार राम प्रकाश शर्मा ने थाना हाथरस जंक्शन में 11 फरवरी 2020 को तहरीर दी। तहरीर में उसने कहा कि प्रार्थी के पुत्र पवन कुमार की शादी 5 मई 2009 को साधारण रूप से रेखा पुत्री रामप्रकाश निवासी लाखनू थाना हाथरस जंक्शन के साथ हुई थी। पुत्रवधू शिक्षा मित्र के पद पर लाखनू में ही कार्यरत थी। इसी कारण रेखा अपने पिता के घर लाखनू में रहती थी। प्रार्थी का पुत्र पवन कुमार अलीगढ़ में एकता नगर थाना क्वार्सी में रहता था और हर हफ्ते बच्चों से मिलने गांव लाखनू आता था। रेखा भी अलीगढ़ आती जाती रहती थी।
हमेशा की तरह 8 फरवरी 2020 को प्रार्थी का पुत्र शाम के करीब छह बजे अपनी पत्नी के बुलाने पर अपनी ससुराल गांव लाखनू आया था। पति पत्नी दोनों आपस में बहुत प्यार से रहते थे। 9 फरवरी को सुबह उसे मोबाइल से सूचना मिली कि उसके पुत्र पवन कुमार की मृत्यु हो गई है। सूचना पर जब वह अपने परिजनों के साथ ग्राम लाखनू आया तो प्रार्थी के पुत्र पवन कुमार का शव मकान के अंदर आंगन में पड़ा था। वह अपने पुत्र का दाह संस्कार करके आया है उसके पुत्र की अज्ञात के द्वारा हत्या कर दी गई है।
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फिर से वादी राम प्रकाश शर्मा की ओर से 15 फरवरी को एक अन्य तहरीर दी गई। तहरीर में कहा कि उसकी तथा उसके पुत्र की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। उसने जानकारी कर ली है उसे पूरा विश्वास है कि उसके पुत्र पवन कुमार की हत्या उसकी पत्नी रेखा, ससुर राम प्रकाश शर्मा व सास ने मिलकर गला दबाकर की है। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने विवेचना के दौरान आरोपी बीना देवी की नामजदगी झूठी पाई। विवेचक ने विवेचना करते हुए रेखा रानी व रामप्रकाश के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
इस मामले में अभियुक्त रामप्रकाश की मृत्यु हो जाने की वजह से उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो त्रिलोकपाल सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत अभियुक्त रेखारानी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी शिवेंद्र सिंह ने की।