नाबालिग के अपहरण में सहयोग करने पर न्यायालय ने महिला को दोषी सिद्ध करते हुए चार साल कैद की सजा सुनाई है। एक को प्रकरण में दोष मुक्त किया है। 15 साल पहले एक किशोर किशोरी को कुछ लोगों के सहयोग से ले गया था। किशोरी के बयान में दुष्कर्म की बात सामने आई थी।
घटना छह अगस्त 2012 की है। पीड़ित किशोरी की मां ने कोतवाली हाथरस गेट में रिपोर्ट दर्ज करते हुए बताया था कि शाम के समय गांव की ही अन्नू उनकी बेटी को बुलाकर घर ले गई थी। अन्नू का उसके घर आना-जाना था। इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए व उसे घर ले गई थी, जिसके बाद गांव का ही किशोर उसे बहला-फुसला कर ले गया था।
आरोप था कि उसकी मां ने भी इस अपहरण में सहयोग किया। पुलिस ने 15 अगस्त को किशोरी को खोज लिया। किशोरी के बयान के बाद मुकदमे में दुष्कर्म की धारा भी बढ़ाई गई। विवेचना में अन्नू की मां गुड्डी देवी का नाम भी प्रकाश में आया। पुलिस ने अन्नू, मीरा व गुड्डी देवी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोपी पर दुष्कर्म की भी धारा लगी। नाबालिग होने के कारण आरोपी की पत्रावली किशोर न्यायालय में विचारण के लिए भेजी गई। शेष तीनों आरोपियों की पत्रावली पर सेशन न्यायालय में ट्रायल शुरू हुआ। विचारण के दौरान गुड्डी देवी की मृत्यु हो गई।
एडीजे एफटीसी कोर्ट प्रथम ने शुक्रवार को प्रकरण में सबूत व गवाहों के आधार पर निर्णय दिया। मीरा देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। अपहरण में सहयोग करने पर आईपीसी की धारा 363 में तीन साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना और धारा 366 में चार साल की कैद व सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।