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Gulab: बरसात में मुरझाया गुलाब का कारोबार, आधे रह गए दाम, हसायन के किसान मायूस

Mon, 01 Sep 2025 02:24 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हसायन कस्बे व देहात क्षेत्र में छोटे-बड़े मिला कर इत्र के करीब 150 कारखाने संचालित हो रहे है। हरेक कारखाने में 30 से 35 मजदूर गुलाब के फूल से अर्क निकाल कर इत्र तैयार करते है।
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गुलाब - फोटो : freepik
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विस्तार
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बेहद लाजवाब खूशबू के साथ हर किसी को तरोताजा कर देने वाला गुलाब इन दिनों आधी कीमत पर बिक रहा है, जिससे इसको पैदा करने वाले हसायन क्षेत्र के किसान खासे परेशान हैं। उन्हें इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है। बरसात के पूरे सीजन में उन्हें आधी कीमत पर ही गुलाब बेचना पड़ रहा है। सर्दी के मौसम में इसकी कीमत 7000 से 8000 रुपये प्रति मन थी, जो अब 3000 से 3500 रुपये रह गई है। इसलिए किसान चिलर प्लांट की स्थापना की मांग कर रहे हैं, ताकि इसको कुछ दिनों के लिए सहेजा जा सके, लेकिन वो भी नहीं बन पा रहा है।

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गुलाब के बड़े खरीदार एवं इत्र कारोबारी सुभाष यादव कहते हैं कि फरवरी से अप्रैल तक आने वाले गुलाब के अर्क में महक अधिक और बहुत अच्छी होती है। जिससे इत्र और दूसरे उत्पाद बेहद सुगंधित रहते हैं। इसलिए इस सीजन के गुलाब का भाव अधिक मिलता है। जुलाई से सितंबर के सीजन में होने वाले गुलाब से निकलने वाले अर्क में महक कम होती है। इसके अलावा बरसात में फूल तुरंत खराब होने लगते हैं। इन दो वजहों से इसका भाव कम रहता है। अमेरिका के टैरिफ का इस पर सीधा कोई असर नहीं है। इसकी आपूर्ति सिर्फ स्वदेशी बाजारों में है।

वर्तमान में हसायन की मंडी में गुलाब की आवक ज्यादा होने से व्यापारी इसका मनमाना रेट दे रहे हैं। यह फूल बहुत जल्द खराब हो जाता है, इसलिए किसान इसको अपने पास रख नहीं पाते हैं। 7000 से 8000 रुपये प्रति 40 किलो (40 किलो यानी एक मन) के भाव से बिकने वाला फूल इन दिनों 3000 से 3500 रुपये में बेचना पड़ रहा है।-प्रवीण कुमार निवसी नवीपुर।
इस बार बाहर से आने व्यापारी नहीं आए हैं इसलिए भी गुलाब की कीमतें बहुत कम हो गई हैं। 3000 से 3500 रुपये प्रति मन का भाव मिल रहा है। इस भाव में किसान का गुजारा मुश्किल हो रहा है। पिछले वर्ष इसी सीजन में 6000 से 8000 रुपये प्रति चालीस किलो के हिसाब से फूल बेचा था।-सुनील कुमार निवासी नगला केसिया।

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अच्छी पैदावार होने के बाद कम रेट होने से किसानों का नुकसान हो रहा है। व्यापारियों द्वारा मनमानी की जा रही है। गुलाब को तरोताजा रखने के लिए किसानों द्वारा कई वर्षो से की जा रही चिलर प्लांट की मांग पर भी शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों द्वारा कतई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।-शिवतेंद्र यादव, हसायन।
 

इत्र के 150 कारखाने हैं संचालित

हसायन कस्बे व देहात क्षेत्र में छोटे-बड़े मिला कर इत्र के करीब 150 कारखाने संचालित हो रहे है। हरेक कारखाने में 30 से 35 मजदूर गुलाब के फूल से अर्क निकाल कर इत्र तैयार करते है। इन दिनों इस कारोबार का सबसे बड़ा सीजन चल रहा है। इन्हीं कारखानों के मालिक स्थानीय किसानों से गुलाब खरीदते हैं।

चिलर प्लांट की मांग
साल की पहली फसल फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीनों में होती है। दूसरी फसल जुलाई, अगस्त और सितंबर में होती है। लगभग 300 किसान 1500 से 2000 बीघा में इसकी पैदावार करते हैं। किसान कई वर्षों से इस क्षेत्र में एक चिलर प्लांट स्थापित करने की मांग कर रहे हैं ताकि गुलाब को कुछ दिनों तक सहेज कर रखा जा सके और उन्हें उचित मूल्य मिल सके, लेकिन अब तक इसकी स्थापना नहीं हो सकी है। बता दें कि इसके लिए किसान कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है।
 
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ऐसे समझें गुलाब का गणित

एक बीघा फसल की लागत 14,000 से 15,000 रुपये तक आती है। एक सीजन में एक बीघा खेत से लगभग 3.20 क्विंटल फूल पैदा होता है। जिसकी कीमत इन दिनों लगभग 28,000 रुपये हो रही है। ऐसे में लागत निकालने के बाद किसान को लगभग 13000 रुपये तक बच रहे हैं। जिससे उनका गुजारा मुश्किल से हो रहा है। 90 दिनों की मेहनत के बाद उन्हें सिर्फ 13000 रुपये ही बच पा रहे हैं।

इत्र, गुलकंद और गुलाब जल में होता है प्रयोग
हसायन का गुलाब कन्नौज, अजमेर, बनारस और मुंबई तक के कारोबारियों के पास पहुंचता है। जहां इसका प्रयोग इत्र, गुलकंद, गुलाब जल, गुलबारी और सौंदर्य प्रसाधन के उत्पादों में किया जाता है। हसायन का अधिकांश गुलाब कन्नौज के व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है। जिससे बड़ी मात्रा में इत्र बनाया जाता है।
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