जिले में गेहूं की खेती से किसानों का मोह तेजी से भंग हो रहा है। वर्ष 2023 से लेकर अब तक गेहूं की बुवाई के क्षेत्रफल (रकबे) में 9,498 हेक्टेयर की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसकी वजह गेहूं की फसल में कम मुनाफा और पिछले तीन वर्षों से कटाई के सीजन में आंधी, बारिश व ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को जबर्दस्त नुकसान पहुंचना मानी जा रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में कुल 81,622 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई की गई थी। अगले साल 2024-25 में यह रकबा घटकर 79,180 हेक्टेयर रह गया। सबसे बड़ी गिरावट वर्तमान सत्र 2025-26 में देखने को मिली है, जहां गेहूं की बुवाई का क्षेत्रफल सिमटकर महज 72,124 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में ही गेहूं की बुवाई का क्षेत्रफल करीब 7,056 हेक्टेयर रह गया है। यदि क्षेत्रफल में गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में न केवल स्थानीय स्तर पर गेहूं की उपलब्धता कम होगी, बल्कि इसकी कीमतों में भी उछाल आ सकता है। जिला कृषि अधिकारी निखिल देव तिवारी ने बताया कि गेहूं के रकबे में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज हुई है। किसानों का रुझान आलू और मक्का जैसी अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ बढ़ रहा है।
गेहूं के क्षेत्रफल की स्थिति (हेक्टेयर में)
वर्ष 2023-24 81,622
वर्ष 2024-25 79,180
वर्ष 2025-26 72,124
इन वजहों से पीछे हट रहे किसान
फसल विविधीकरण : किसान अब पारंपरिक गेहूं के बजाय तिलहन (सरसों) या नकदी फसलों (सब्जियां आदि) की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें कम समय और कम पानी में अधिक मुनाफा मिलता है।
लागत और मुनाफा : खाद, बीज और सिंचाई की बढ़ती लागत के मुकाबले गेहूं का उचित मूल्य न मिल पाना भी एक बड़ी वजह है।
जलवायु परिवर्तन : बेमौसम बारिश और तापमान में अनिश्चितता के कारण गेहूं की फसल को होने वाला नुकसान किसानों को डरा रहा है।
एक बीघा की पैदावार में सिर्फ 12 हजार रुपये की बचत
एक बीघा खेत में गेहूं की बुवाई में करीब पांच हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है, जबकि एक बीघा में करीब चार से पांच क्विंटल ही गेहूं की पैदावार हो पाती है। इस आधार पर एक बीघा में किसान को महज 12 हजार रुपये तक मिल पाते हैं। मौसम खराब होने की दशा में रेटों में गिरावट आने पर नुकसान होता है। अगर किसान पट्टे पर खेत लेकर गेहूं की पैदावार करता है तो उसे महज दो से तीन हजार रुपये प्रति बीघा की ही बचत हो पाती है।
बोले किसान
गेहूं की फसल करने के बाद साल में महज एक और फसल हो पाती है। मौसम की मार के कारण भी गेहूं की पैदावार करना कम कर दिया है।
-चंद्रशेखर, गिजरौली
गेहूं की फसल में बचत कम होती है। पट्टे पर खेत लेने पर तो कुछ भी मुनाफा नहीं बचता है। इस कारण किसान आलू की पैदावार ज्यादा करते हैं।
नागेंद्र सिंह, झींगुरा।