जिले में साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। चालू वर्ष में एक जनवरी से 10 जून तक साइबर ठगों ने जिलेवासियों से दो करोड़ 45 लाख 22 हजार 506 रुपये की ठगी कर ली। इस दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 977 शिकायतें दर्ज हुईं, जो बताती हैं कि जिले में प्रतिदिन औसतन छह लोग साइबर अपराध का शिकार बन रहे हैं।
हालांकि साइबर सेल की सक्रियता से ठगी गई रकम में से एक करोड़ 65 हजार 522 रुपये से अधिक राशि फ्रीज कराई जा चुकी है। साथ ही अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए 2,124 मोबाइल नंबर और 2,211 आईएमईआई नंबर ब्लॉक करवाए गए हैं।
जांच में बैंकों की लापरवाही भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार कई करंट अकाउंट बिना उचित भौतिक सत्यापन के खोले जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में पुलिस जब साइबर फ्रॉड से जुड़े खातों के पते पर पहुंची तो वहां न कोई फर्म मिली और न ही उसका संचालक। ऐसे डमी खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को खपाने में किया जा रहा है। वहीं बैंक पुलिस को जरूरी जानकारी देने में भी काफी देरी कर रहे हैं।
साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार का कहना है कि 25 प्रतिशत साइबर ठगी एपीके फाइल या लिंक भेजकर मोबाइल हैक करने से जुड़ी है, जबकि 20 प्रतिशत मामले ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर अंजाम दिए जा रहे हैं। शेष मामलों में डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग और अन्य झांसे शामिल हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ठगी के बाद शुरुआती 30 से 40 मिनट बेहद अहम होते हैं, क्योंकि अपराधी इस दौरान रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेते हैं। इसलिए किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।
सतर्कता ही एकमात्र बचाव है
-1970 पर तुरंत करें कॉल : साइबर फ्रॉड का पता चलते ही बिना देरी किए नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर -1970 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते रकम को फ्रीज किया जा सके।
-एपीके फाइल डाउनलोड न करें : किसी भी अज्ञात स्रोत, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आए लिंक से कोई भी ऐप (एपीके फाइल) इंस्टॉल न करें।
-गूगल सर्च पर अंधविश्वास न करें : गूगल पर मिलने वाले कस्टमर केयर या कंपनियों के नंबर अक्सर फेक होते हैं। वहां से नंबर लेकर कॉल करने से बचें।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के झांसे में न आएं : रातों-रात पैसा दोगुना करने का दावा करने वाली किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग साइट या एप पर भरोसा न करें।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं : यदि कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर आपको वीडियो कॉल पर बंधक बनाने यानी डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है, तो डरे नहीं। कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। तुरंत फोन काटें और शिकायत करें।