इन गांवों में पानी भरा होने के कारण बिजली आपूर्ति ठप है। जिन घरों में सोलर पैनल लगे हैं, उनसे ग्रामीण मोबाइल चार्ज कर परिचितों को बाढ़ के हालात की जानकारी दे रहे हैं। बाढ़ से मकान गिरने लगे हैं और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। जो लोग बीमार हैं, उनको दवा नहीं मिल पा रही है। डीएम और एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित कुछ गांवों का भ्रमण किया और मुआवजे का आश्वासन दिया, लेकिन इससे ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि न तो पानी की निकासी की व्यवस्था हुई है और न ही अन्य कोई सहायता दी गई है। राशन तक नहीं मिल पा रहा है।
बाढ़ प्रभावित इन गांवों में हैं बुरे हालात
वर्तमान में गोपालपुर, महाराजपुर, दौकेली, सिहोर, नगला मंधाती, बरसामई, सिंचावली कदीम, रामपुर, सुल्तानपुर, नगला ब्राहमण, नगरिया पट्टी देवरी, सुल्तापुर, रामपुर, देवरी, सुआ, मोहनपुर, नगला मियां, असोई, सिहोरी, गुजरपुर, नगला उदैया आदि गांवों में पानी भरा हुआ है।
जलकुंभी से अटी है ईशन नदी
ईशन नदी में बाढ़ के हालात 25 साल बाद बने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जब बाढ़ आई थी, तब भी खेतों और गांवों के रास्तों तक पानी पहुंचा था, घरों में नहीं घुसा था। तीन दिन बाद भी जलस्तर कम न होने की वजह भी ईशन नदी ही है। यह जलकुंभी और मलबे से अटी पड़ी है और पानी आगे नहीं जा पा रहा है।