हाथरस की चुनावी आबोहवा में हींग सी खुशबू और भांति-भांति के रंग बिखरे हैं। मतदाता बेहद मुखर हैं। न अपनी दुश्वारियां बताने से हिचकते हैं और न ही अपनी पक्षधरता स्पष्ट करने से भय खाते हैं। चुनाव पर चर्चा शुरू होते ही अधिकतर लोग अपना रुख स्पष्ट कर देते हैं कि वे किधर हैं। साफ है कि मतदाता किसी अगर-मगर में नहीं हैं।
हाथरस एससी के लिए सुरक्षित सीट है। पर, यहां कभी बसपा-सपा का खाता नहीं खुला। 1991 की रामलहर से यहां भाजपा ही जीतती रही है। 2009 में जरूर रालोद प्रत्याशी जीता था, लेकिन तब रालोद-भाजपा का गठबंधन था। 2019 के चुनाव में भाजपा के राजवीर दिलेर जीते थे। उन्होंने 2,60,208 मतों के अंतर से सपा के रामजीलाल सुमन को पटकनी दी थी।
इस बार राजवीर के बजाय भगवा खेमे ने अनूप प्रधान वाल्मीकि को मैदान में उतारा है। हाथरस के चुनावी बयार का रुख भांपने के लिए सबसे पहले हम सादाबाद विधानसभा क्षेत्र के मढ़ाका पहुंचे। यहां मिले राजकुमार और बलवीर सिंह कहते हैं, हमारी सीट तो भाजपा का गढ़ है।
रात-बिरात कहीं भी जा सकते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था। दलवीर सिंह ने टोकने के अंदाज में बीच में ही सवाल उछाल दिया, क्या अब किसानों की भैंसें नहीं खुल (चोरी) रही हैं? कैलाश ठेनुआ बताते हैं कि सपा प्रत्याशी जसवीर वाल्मीकि काफी सीधे हैं। इस बार उन पर दांव लगाकर देखेंगे। वे क्षेत्र में काफी मेहनत भी कर रहे हैं।
UP Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
हाथरस की चुनावी आबोहवा में हींग सी खुशबू और भांति-भांति के रंग बिखरे हैं। मतदाता बेहद मुखर हैं। न अपनी दुश्वारियां बताने से हिचकते हैं और न ही अपनी पक्षधरता स्पष्ट करने से भय खाते हैं। चुनाव पर चर्चा शुरू होते ही अधिकतर लोग अपना रुख स्पष्ट कर देते हैं कि वे किधर हैं। साफ है कि मतदाता किसी अगर-मगर में नहीं हैं।
हाथरस एससी के लिए सुरक्षित सीट है। पर, यहां कभी बसपा-सपा का खाता नहीं खुला। 1991 की रामलहर से यहां भाजपा ही जीतती रही है। 2009 में जरूर रालोद प्रत्याशी जीता था, लेकिन तब रालोद-भाजपा का गठबंधन था। 2019 के चुनाव में भाजपा के राजवीर दिलेर जीते थे। उन्होंने 2,60,208 मतों के अंतर से सपा के रामजीलाल सुमन को पटकनी दी थी।
इस बार राजवीर के बजाय भगवा खेमे ने अनूप प्रधान वाल्मीकि को मैदान में उतारा है। हाथरस के चुनावी बयार का रुख भांपने के लिए सबसे पहले हम सादाबाद विधानसभा क्षेत्र के मढ़ाका पहुंचे। यहां मिले राजकुमार और बलवीर सिंह कहते हैं, हमारी सीट तो भाजपा का गढ़ है।
रात-बिरात कहीं भी जा सकते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था। दलवीर सिंह ने टोकने के अंदाज में बीच में ही सवाल उछाल दिया, क्या अब किसानों की भैंसें नहीं खुल (चोरी) रही हैं? कैलाश ठेनुआ बताते हैं कि सपा प्रत्याशी जसवीर वाल्मीकि काफी सीधे हैं। इस बार उन पर दांव लगाकर देखेंगे। वे क्षेत्र में काफी मेहनत भी कर रहे हैं।
ठेनुआ के तर्कों पर राजवीर सिंह कहते हैं, सपा प्रत्याशी सज्जन जरूर हैं, पर इसका फायदा उन्हें अगले चुनाव में ही मिल सकता है। इस चुनाव में तो फिलहाल कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। रवि पचौरी भाजपा प्रत्याशी को आगे बताते हैं, तो साकेत चौधरी सपा और भाजपा में टक्कर बताते हैं। साकेत कहते हैं, बसपा प्रत्याशी तो क्षेत्र में दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। इसपर हीरा लाल ने धीरे से कहा, बसपा हमेशा खामोशी से लड़ाई लड़ती है।
ग्राम पंचायत महो खास के सुरेंद्र कुमार बताते हैं, मेरे यहां तो भाजपा का ही सिक्का चल रहा है। भिखारी दास वार्ष्णेय मानते हैं कि हिंदुत्व का मुद्दा ही सबसे बड़ा है। वहीं, सुधीर सेंगर कहते हैं, भाजपा क्षत्रिय नेतृत्व को दरकिनार कर रही है। रोजगार के फ्रंट पर भी विफल है। पेट्रोल की कीमत भी काफी बढ़ा दी है।
समस्याओं को लेकर नाराजगी, तो लाभार्थी योजनाओं का भी असर
सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र के बघराया में ग्रामीण काफी गुस्से में दिखे। बारिश में घरों में पानी भर जाता है। एक सड़क बन जाए तो दुश्वारियां कम हो जाएं। बात जब चुनाव की शुरू हुई तो भगवान देई कहती हैं, हम तो अरसे से भाजपा को ही वोट देते आ रहे हैं। इस बार किसको वोट देंगी? इस सवाल पर वह कहती हैं, परिपाटी तो नहीं ही तोड़ेंगे।
नागेंद्र सिंह कहते हैं, भाजपा के अलावा देश की राजनीति में कोई मजबूत विकल्प नहीं है। प्रेम शंकर सारस्वत कहते हैं कि भाजपा के शासन में सबको राशन मिल रहा है। शौचालय और आवास भी मिले हैं। जुगेंद्र कुमार गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से खफा दिखे। उन्होंने कहा-ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो कोई और निर्णय लूंगा।
हाथरस जंक्शन के पास मिले देवी नगर के अरशद खान और बबलू मियां कहते हैं कि यह सरकार सबको समान भाव से नहीं देखती। वे कहते हैं, जीते चाहे हारे, हम तो सपा के ही साथ हैं।
समस्याओं पर मुखर...विकल्प का भी सवाल
हाथरस शहर के सिटी प्लाजा में मिले कपिल अग्रवाल कहते हैं कि इससे ज्यादा अफसोस की बात क्या होगी कि किसी राजनीतिक पार्टी के घोषणापत्र में व्यापारियों का कोई जिक्र नहीं है। चक्रवर्ती गोयल जीएसटी के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को जायज नहीं मानते। साथ ही कहते हैं कि वैश्य समुदाय भाजपा के साथ दृढ़ता से खड़ा है। जो कठिनाइयां हैं, उन्हें दूर कराने के लिए संघर्ष आगे भी जारी रखेंगे। युवा वोटर धैर्य अग्रवाल बताते हैं कि भाजपा के अलावा हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
रमन अग्रवाल का कहना था कि अफसरों की मनमानी पर लगाम लगनी चाहिए और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में भाजपा यह भी करके दिखाएगी। हाथरस शहर के देवेंद्र कुमार बसपा और अर्जुन वाल्मीकि सपा को मुुकाबले में मानकर चल रहे हैं।
अनूप प्रधान वाल्मीकि, भाजपा
वाल्मीकि ने वर्ष 2005 से ही सियासत में पैर जमाने शुरू कर दिए थे। अलीगढ़ के पिसावा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। रकराना से 2010 में ग्राम प्रधान बने। 2012 में भाजपा ने खैर से विधायकी का टिकट दिया, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने। 2017 में पहली बार विधायक बने। दूसरी बार बसपा के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की और फिर योगी सरकार में राजस्व राज्यमंत्री बने।
जसवीर वाल्मीकि, समाजवादी पार्टी
जसवीर सहारनपुर के देवबंद के रहने वाले हैं। यह चेहरा यहां के क्षेत्रीय लोगों के लिए एकदम नया है। पार्टी वोट बैंक के सहारे चुनावी मैदान में पैर जमाए हुए हैं।
हेम बाबू, बसपा
बसपा प्रत्याशी हेम बाबू धनगर आगरा के रहने वाले हैं। वे बसपा के काडर वोटबैंक के सहारे इस जमीन पर जीत की राह तलाश रहे हैं। शिक्षा की बात करें तो बसपा प्रत्याशी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।