एदल सिंह के मकान का जर्जर टिन शेड। संवाद
- फोटो : samvad
जनपद में आवास विहीन परिवारों की कमी नहीं है, तमाम परिवार ऐसे हैं जो बरसात में कच्चे मकान की छत पर तिरपाल डालकर जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे लोगों के आवेदन दो साल से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में लंबित पड़े हैं।
दो साल पहले 5000 लोगों ने आवास के लिए आवेदन किए थे। शासन से 1500 आवासों का लक्ष्य भी आया हुआ है, दो बार लाभार्थियों का सत्यापन भी हो चुका है। इन आवेदकों में कई आवासों की हालत तो बहुत खराब है। कुछ तो कच्चे मकानों की छत पर तिरपाल डालकर जीवन यापन कर रहे हैं। बारिश अगर तेज हो जाए तो पूरी रात जागकर ही काटनी पड़ती है। दूसरी ओर गरीबों के आवासों को लेकर वसूली का खेल भी जोरों पर रहा है, जिसकी शिकायतें भी होती रही हैं, जिसके चलते लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया अटकी हुई है।
एक साल से पक्का मकान का सपना देख रहे एदल सिंह
शहर से सटे गांव भगवंतपुर निवासी एदल सिंह अपने परिवार के साथ एक जर्जर मकान में रह रहे हैं। जर्जर मकान में तिरपाल डालकर परिवार रह रहा है। करीब एक साल पहले मकान का आवेदन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई है।
बारिश होते ही टपकने लगती है मेवाराम के मकान की छत।
मथुरा रोड के गांव हतीसा निवासी मेवाराम की हालत यह है कि हल्की सी बारिश होते ही उनके मकान की छत से पानी टपकने लगता है। छत की कई बार मरम्मत कराई, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। मकान की मियाद पूरी हो चुकी है। दो साल पहले उन्होंने आवास के लिए आवेदन किया था।