सहपऊ नगर पंचायत बोर्ड का कार्यकाल तीन जनवरी को समाप्त हुआ और चार जनवरी को 17 कार्यकारी संस्थाओं को विकास कार्यों का 1.30 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। इसमें उन कार्यों का भुगतान भी शामिल था, जो पूरे नहीं हुए थे।
हाथरस डीएम ने नगर पंचायत सहपऊ में बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने बाद आनन-फानन में अनियमित तरीके से 1.30 करोड़ रुपये का भुगतान करने के मामले में लिपिक अनुपम गुप्ता और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है। तत्कालीन ईओ ईओ मणिजी सैनी के निलंबन की संस्तुति शासन की गई है।
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नगर पंचायत बोर्ड का कार्यकाल तीन जनवरी को समाप्त हुआ और चार जनवरी को 17 कार्यकारी संस्थाओं को विकास कार्यों का 1.30 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। इसमें उन कार्यों का भुगतान भी शामिल था, जो पूरे नहीं हुए थे। उस समय ईओ का तबादला हो चुका था। भुगतान और अन्य कार्यों के लिए एडीएम की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी, लेकिन उससे पहले ही ईओ भुगतान कर स्थानांतरण पर चले गए। इस समय वह जहांगीराबाद नगर पालिका में तैनात है।
इसकी शिकायत नगर पंचायत सहपऊ के पूर्व अध्यक्ष विपिन कुमार वशिष्ठ ने 19 जनवरी डीएम, मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव नगर विकास, निदेशक स्थानीय निकाय से की थी। डीएम ने इसकी जांच अपर जिलाधिकारी न्यायिक मुहम्मद मोइनुल इस्लाम को सौंपी थी। एडीएम ने जांच में तत्कालीन ईओ मणिजी सैनी, नगर पंचायत में अस्थायी तौर तैनात लिपिक अनुपम गुप्ता और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरेंद्र सिंह को दोषी पाया है।
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बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के अगले दिन ही किया भुगतान
तीन जनवरी को नगर पंचायत का कार्यकाल समाप्त हुआ। चार जनवरी को 1.30 करोड़ रुपये भुगतान जारी किया गया था। पांच जनवरी को संबंधित संस्थाओं के खाते में यह पहुंच गया और छह जनवरी ईओ तबादले पर चले गए। भुगतान के इस पूरे खेल को आननफानन में अंजाम दिया गया।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लिया जा रहा था लिपिक का कार्य
हरेंद्र सिंह की नियुक्ति नगर पंचायत में चतुर्थ श्रेणी कर्माचारी के रूप में है। लेकिन उनसे कर संग्रह पटल पर कार्य लिया जा रहा था। जांच में पाया गया है कि भुगतान प्रक्रिया की फाइल हरेंद्र और अनुपम ने तैयार की और तत्कालीन ईओ हस्ताक्षर कर उसे जारी किया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होते हुए भी हरेंद्र से महत्वपूर्ण कार्य कराए जा रहे थे। इसकी भी जांच चल रही है।