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टीटीजेड : 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा हवाई, 15 से 18 घंटे ही मिल रही

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शहर के एक बिजलीघर में लगा ट्रांसफाॅर्मर। संवाद - फोटो : Samvad
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ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में शामिल होने के बावजूद जनपद के उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली नहीं मिल रही है। सर्वोच्च न्यायालय की मंशा और टीटीजेड क्षेत्र के लिए निर्धारित प्रावधानों के बावजूद ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में अघोषित कटौती जारी है। हालात यह हैं कि टीटी जैड के ग्रामीण इलाकों में 12 से 16 घंटे ही बिजली मिल रही है।
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जनपद के मीतई, बामौली, सादाबाद और ओढ़पुरा विद्युत उपकेंद्र टीटीजेड क्षेत्र में आते हैं। इन क्षेत्रों के ग्रामीण उपभोक्ताओं को 18 घंटे से भी कम बिजली आपूर्ति की जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें निर्धारित समय से काफी कम बिजली मिल रही है। वहीं टीटीजेड के शहरी क्षेत्रों में भी 24 घंटे आपूर्ति का दावा जमीनी स्तर पर पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा। इन इलाकों में कभी 18 तो कभी 20 से 22 घंटे ही बिजली मिल रही है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि सासनी, हसायन और सिकंदराराऊ जैसे नॉन-टीटीजेड क्षेत्रों की तरह ही टीटीजेड क्षेत्र में भी अघोषित रोस्टर लागू कर दिया गया है। इससे टीटीजेड में शामिल होने का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि जब उन्हें वही बिजली व्यवस्था मिल रही है जो सामान्य क्षेत्रों को मिलती है, तो विशेष क्षेत्र का दर्जा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।
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क्या है टीटीजेड का उद्देश्य

ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र है, जिसमें हाथरस, आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद जैसे जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। इनका उद्देश्य उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है, ताकि डीजल जनरेटर के उपयोग की आवश्यकता न पड़े और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी कारण टीटीजेड क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति को विशेष महत्व दिया गया है।


गंभीरता से लागू हों नियम

उपभोक्ताओं का कहना है कि टीटीजेड क्षेत्र को मिलने वाली विशेष सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से विशेष दर्जा दिया गया है तो बिजली आपूर्ति से जुड़े प्रावधानों को भी पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाना चाहिए। इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी बल्कि उद्योगों और कारोबार को भी मजबूती मिलेगी।


धड़ल्ले से चलते हैं जनरेटर
व्यापारियों और उद्यमियों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से उन्हें जनरेटर और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर जनरेटर के कारण वायु प्रदूषण होता है। डीजल भट्टियों से तो वातावरण पर और असर पड़ता है।


जनपद में लागू है यह रोस्टर

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का निर्धारित रोस्टर 18 घंटे, जबकि कृषि ट्यूबवेलों के लिए 10 घंटे तय है। नॉन-टीटीजेड हो या सामान्य क्षेत्र, रूटीन रोस्टर को दो भागों में बांटा गया है। ग्रुप ए में सुबह 7:30 बजे से 11:00 बजे तक और दोपहर 1:30 बजे से 4:00 बजे तक बिजली बाधित रहती है। ग्रुप बी में सुबह 5:15 बजे से 8:15 बजे तक और 10:30 बजे से 1:30 बजे तक आपूर्ति रोकी जाती है।

बॉक्स
टीटीजेड में शामिल विद्युत सब स्टेशन

-मीतई

220 किलोवोल्ट

-सादाबाद

132 किलोवोल्ट

-बामौली

132 किलोवोल्ट

-ओढ़पुरा

132 किलोवोल्ट

टीटीजेड क्षेत्र में रहने के बावजूद भी हमें नियमित 24 घंटे बिजली नहीं मिलती। दिन और रात में कई बार कटौती होती है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित होते हैं। यदि सर्वोच्च न्यायालय की मंशा के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
-सुरेंद्र वार्ष्णेय, व्यापारी।



बिजली कटौती के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। कई बार लंबे समय तक बिजली न आने पर जनरेटर चलाना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ जाता है। टीटीजेड क्षेत्र के लिए बनाए गए नियमों का पूरी तरह पालन होना चाहिए और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
-सुरेश अग्रवाल, व्यापारी।


टीटीजेड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर लागू होता है, 18 घंटे बिजली दी जाती है। शहरी क्षेत्र में 24 घंटे आपूर्ति का प्रावधान है। कहीं खराबी होने या फिर इमरजेंसी होने पर आपूर्ति बाधित हो जाती है।
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-अजीत कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता वितरण, हाथरस।
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