भैया दूज पर अपने भाई को तिलक करती बहन।
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भाई बहन के अटूट प्रेम की परिकल्पना मंगलवार को साकार हो उठी। मौका था भैयादूज का। घरों में जश्न का माहौल रहा। पूजा-अर्चना कर बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक किया। मिठाई से मुंह मीठा कराने के बाद गोला भेंटकर बहनों ने भाई की सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की।
भाइयों ने भी बहनों को उपहार दिए। इसके साथ ही मंगलवार को दीपोत्सव का समापन हो गया। दीपोत्सव पर्व की शृंखला में गोवर्धन पूजा के अगले दिन ही भैया दूज का पर्व मनाया गया। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन भाई और बहन एक साथ यमुना में स्नान कर यम फांस से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।
इसके साथ ही बहनें भाइयों के माथे पर तिलक कर नारियल का गोला और मिठाई भेंट कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। पर्व को लेकर सुबह से ही भाई बहनों के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे रहे। किसी कारणवश बहन नहीं आ सकीं तो भाइयों ने उनके घर पहुंचकर टीका कराया। वहीं जो बहनें भाइयों के यहां नही जा सकीं, उन्हाेंने गोले पर ही तिलक कर त्योहार की रस्म निभाई। देर रात तक तिलक करने और कराने का सिलसिला जारी रहा।
वहीं भैयादूज पर रोडवेज बसों और ट्रेनों में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। यात्रियों को जान जोखिम में डालकर बसों व ट्रेनों की छत और पायदान पर लटक कर यात्रा करनी पड़ी। डग्गेेमारों ने भी मौके का खूब फायदा उठाया। डग्गेमारों ने यात्रियों से मनमाने दाम वसूल कर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाया। लोगों को सफर में काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को भैया दूज पर्व पर भाई बहन एक दूसरे के घर पहुंचकर पर्व की परंपराओं को पूरा करते हैं। पर्व पर सुबह से ही रोडवेज बसों, ट्रेनों में भाई बहनों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। काफी संख्या में भाई बहन अपने निजी वाहनों से भी गए, लेकिन फिर भी भाई बहनों की संख्या के आगे वाहनों की संख्या काफी कम पड़ गई।
सफर में यात्रियों ने काफी मुसीबतें झेलीं। रोडवेज बसों में यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नसीब नहीं हुई। अधिक भीड़ के कारण उन्हें बसों में धक्के खाते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। काफी लोगों ने बसों की छत व पायदान पर लटक कर अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा पूरी की।