सलमान अली ने बताया कि उसने 10वीं तक पढ़ाई की है। कोई नौकरी नहीं मिली। वह विवेक यादव पुत्र अंतर सिंह यादव निवासी जे नं. 14 कोलार कॉलोनी झुगिया सारेस नगर भोपाल मध्य प्रदेश, सागर घोसले पुत्र संतोष घोसले निवासी हाउस नं. 114 भीम नगर बिहाइंड खेत चसरावत सीटीटी नगर भोपाल व रचित निवासी भोपाल के संपर्क में आया। जिन्होंने उसको कुछ खाते खुलवाकर दिए। सबने मिल कर नकली पुलिस वाला बनकर हाथरस के व्यापारी की जानकारी प्राप्त कर उससे 12 लाख रुपये खातों में हस्तांतरित कराए। उस रकम को अपने अन्य साथियों के ही अलग-अलग बैंक खातों में नेट बैंकिंग व यूपीआई के माध्यम से भेजा। जो रुपये बैग में मिले, यह वही रुपये हैं। इन रुपयों को मथुरा में निवेश करना था। आरोपी ने कई साथियों के बारे में जानकारी दी है, जो भोपाल मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं।
बाहर पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को बनाते थे निशाना
आरोपी ने बताया कि वह विभिन्न माध्यमों से कोटा व अन्य स्थानों में घर से बाहर पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के परिजनों के संबंध में जानकारी जुटाते थे। उसके बाद फर्जी पुलिस की आईडी लगाकर लोगों को डराकर, धमकाकर उनसे खातों में पैसे डलवाते थे। इसके लिए वह कुछ अन्य खाताधारकों की पासबुक, एटीएम कार्ड व मोबाइल नंबर अपने पास रख लेते थे, ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके।
सलमान दिल्ली से गया था जेल
आरोपी सलमान अली कुछ समय पहले साइबर क्राइम थाना आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट नई दिल्ली द्वारा साइबर ठगी के मामले में जेल भेजा जा चुका है। वहां मुकदमा दर्ज है, वह काफी समय जेल में भी बंद रहा।