सिकंदराराऊ के बहुचर्चित सत्संग हादसे में बृहस्पतिवार को एडीजे कोर्ट संख्या-01 के समक्ष पेश हुए चश्मदीद गवाह ने बचाव पक्ष की जिरह के दौरान अपने शुरुआती बयानों से इतर कई बातें कहीं। गवाह ने कोर्ट में स्वीकार किया कि घटना जानबूझकर नहीं की गई थी, बल्कि अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण व जल्दबाजी में यह हादसा हुआ।
गवाह अवनीश कुमार निवासी गांव उमरावपुर, सिकंदराराऊ ने कोर्ट में कहा कि उसने दो-ढाई लाख की भीड़ का केवल अंदाजा लगाया था, जो गलत भी हो सकता है। कोर्ट रूम में उसने अंदाजे से लोगों की संख्या 10 से 12 बताई। गिनती के दौरान अपना ही अंदाजा गलत साबित होने पर उसने माना कि वास्तविक संख्या और अंदाजे में फर्क होता है।
जिरह के दौरान जब गवाह को उसका पुलिस बयान पढ़कर सुनाया गया, तो उसने स्वीकार किया कि पुलिस को दिए बयान में किसी आयोजक, सेवादार या सुरक्षा गार्ड का नाम दर्ज नहीं था।
चरण रज और बाबा का आवागमन
गवाह ने बताया कि बाबा मंच तक आने और जाने के दौरान कहीं भी जमीन पर पैदल नहीं चले थे। अतः मिट्टी पर पैर पड़ने या चरण रज उठाने जैसी स्थिति नहीं थी। गवाह ने स्पष्ट किया कि आयोजकों, सेवादारों या गार्ड्स की श्रद्धालुओं से कोई व्यक्तिगत रंजिश या वैमनस्यता नहीं थी। वे सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए तैनात थे। गवाह के अनुसार दो जुलाई 2024 को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद गर्मी और भीषण उमस के कारण लोग जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहते थे। इस दौरान मची भगदड़ के कारण यह हादसा हुआ। उसने स्वीकार किया कि घटनास्थल पर उसने न तो कोई गड्ढा-पानी देखा था और न ही किसी को गड्ढे में गिरते देखा। अगली सुनवाई 17 सितंबर की नियत की गई है।