सिकंदराराऊ। नगरीय क्षेत्र में लगातार गिर रहा भूजल स्तर खतरे की घंटी बजाने लगा है। हैडपम्प पानी छोड़ने लगे हैं। समस्या से निजात पाने के लिए नगर में हर रोज धड़ाधड़ दर्जनों सबमर्सिबल की बोरिंग हो रही है। लेकिन उस वक्त हालात क्या होंगे जब समर का जलस्तर भी नीचे चला जाएगा।
बता दें कि पिछने कुछ वर्षो से मई-जून में नगर का वाटर लेबल कुछ समय से नीचे चला जाता था। लेकिन हैंडपम्प जिनकी की बोरिंग 50- 60 फिट नीचे चली जाती थी। बारिश होते ही वाटर लेबल पुन: ठीक हो जाता। पिछले कुछ वर्षो में लगातार कम हो रही बारिश से भूगर्भ जल स्तर लगतार नीचे जाता रहा। इस वर्ष मई के प्रारम्भ में ही नगर के साठ फीसदी हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया। इससे निजात पाने के लिये नगर में प्रतिदिन दर्जनों समर पम्पों की 100-125 फीट नीचे बोरिंग शुरु हो गई है। सवाल यह उठता है कि कम बारिश के चलते जब पानी का स्तर 100 फुट से भी नीचे चला जायेगा तब क्या होगा।
जानकारों का कहना है कि समर पम्प प्रयोग करना सामयिक है लेकिन ज्यादा पानी का प्रवाह उसकी बर्बादी को जन्म दे रहा है जो कि चिंता का विषय है। बारिश के पानी की एक-एक बूंद के संचय के साथ हमें समर का भी एक बूंद पानी बर्बाद नहीं करना चाहिये। पर्यावरण में गर्मी की वजह से बारिश का चक्र प्रभावित हुआ है। किसानों को भी कम पानी की फसल उगानी चाहिये जिससे कम पानी का इस्तेमाल हो।
चेयरमैन पति इकराम कुरेशी का कहना है कि पानी की बर्बादी को रोकने के लिये नगर में शीघ्र जनजागरण अभियान चालाया जायेगा। नगर में पालिका द्वारा पानी की आपूिर्त के लिये नई पाईप डालने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है मंजूर होने पर पालिका पुन: नगर में पानी की सप्लाई करेगी।