दूध पिलाने के बाद मासूम बच्चों को थपकी देकर डकार दिलाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। थपकी नहीं दिलाने से बच्चों को डकार नहीं आती है, जिससे दूध सांस की नली में फंस जाता है और कई बार इससे मासूम बच्चे की मौत तक हो जाती है। जिले में बीते तीन महीनों के भीतर थपकी नहीं दिलाने से दूध सांस की नली में फंस गया और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई।
चार माह के बच्चे की मौत
गांव तरफरा के रहने वाले शकील की चार माह की बेटी अक्शा की सोमवार रात को अचानक तबीयत बिगड़ गई। शकील ने बताया कि मां ने बच्ची को दूध पिलाया था। इसके कुछ देर बाद ही बच्ची तड़पने लगी, वह रो भी नहीं पा रही थी।
जब तक वे उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, उसने तड़पना बंद कर दिया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक ने सांस नली में दूध अटकने से मौत की आशंका जाहिर की। परिजन राेते-बिलखते हुए उसका शव गांव ले गए।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बीते दो महीने में यह तीसरा मामला है, जब किसी मासूम की इस तरह जान गई हो। इससे पहले 8 दिसंबर को एक माह के बच्चे की मौत हो गई थी। हाथरस जंक्शन के गांव लाड़पुर में रवि कुमार का बेटा आरव दूध पीकर सोया था।
जब वह नहीं उठा तो परिजन जिला अस्पताल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने सांस नली में दूध फंसने की आशंका जताई। इसी वजह से मौत होने की बात कही। इसी तरह 17 नवंबर को हाथरस गेट के गांव जोगिया में नरेश के साढ़े चार माह के बेटे व्यवांश की मौत हो गई थी। उसे मौत से कुछ देर पहले दूध पिलाया गया था। डॉक्टरों ने बताया था कि सांस नली में दूध फंसने से उसकी जान चली गई।
20 मिनट की थपकी बचाएगी जान
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद कुमार ने बताया कि शिशुओं की भोजन नली और सांस नली बहुत पास-पास होतीं हैं। दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को सीधा लिटा दिया जाए तो दूध वापस ऊपर आकर सांस नली में फंस सकता है, जिससे दम घुटने से तत्काल मौत हो जाती है। इसलिए दूध पिलाने के बाद बच्चे को कम से कम 20 मिनट तक कंधे से सटाकर सीधा रखें तथा थपकी देकर डकार दिलाएं। दूध पिलाते समय बच्चे का सिर ऊपर रखें। लेटकर किसी भी हाल में दूध न पिलाएं।