सहालग में शहर के बर्तन बाजार में वह चमक दिखाई नहीं दे रही, जिसकी उम्मीद थी। धातुओं के बढ़े दाम और किसानों को हुए नुकसान का असर बर्तनों की खरीद पर पड़ा है। शादी-विवाह वाले परिवार भी बर्तनों की लंबी सूची को छोटा कर केवल जरूरत का सामान खरीद रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस बार सहालग में कारोबार पिछले वर्षों के मुकाबले आधा भी नहीं हुआ है।
शहर के प्रमुख बर्तन बाजारों में सहालग के दिनों में सुबह से ही खरीदारों की आवाजाही शुरू हो जाती थी। शादी में दिए जाने वाले स्टील, पीतल और तांबे के बर्तनों की खरीद के लिए परिवार बाजार पहुंचते थे, लेकिन इस बार ग्राहकों की संख्या कम है।
जो ग्राहक पहुंच रहे हैं, वह भी कीमत पूछने के बाद अपनी सूची में कटौती कर रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार स्टील के बर्तनों के दाम गुणवत्ता के अनुसार करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो, पीतल के भाव करीब 950 रुपये प्रति किलो, जबकि तांबे के बर्तनों की कीमत 1500 रुपये प्रति किलो से ऊपर है। महंगी धातुओं के कारण बर्तनों की कीमत बढ़ी है।
जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है। बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की शादी-विवाह की खरीद भी फसल से होने वाली आय पर निर्भर है। बर्तन कारोबारियों का कहना है कि आलू किसानों को हुए नुकसान का असर इस बार बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। जिन परिवारों ने सहालग में बड़ी खरीदारी की तैयारी की थी, वह अब कटौती कर रहे हैं।
चुनिंदा सामानों की हो रही खरीद
थोक बर्तन कारोबारियों के पास फुटकर दुकानदारों की मांग कम है। कारोबारी सहालग के लिए अतिरिक्त माल मंगाने से बच रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि पहले शादी के लिए बड़े बर्तन सेट, बाल्टी, परात, भगोने और अन्य सामान एक साथ खरीदा जाता था। अब ग्राहक जरूरत के हिसाब से चुनिंदा बर्तन ही खरीद रहे हैं।
50 फीसदी भी नहीं पहुंचा कारोबार
इस बार सहालग में बर्तन कारोबार सुस्त है। खेती में हुए नुकसान का असर ग्रामीण क्षेत्र की खरीदारी पर दिखाई दे रहा है। धातुओं के दाम भी काफी बढ़े हुए हैं। पिछली सहालग की तुलना में इस बार कारोबार 50 फीसदी तक भी नहीं हुआ है। फुटकर विक्रेता बहुत कम माल उठा रहे हैं।
-कार्तिक अग्रवाल, थोक बर्तन कारोबारी।
जरूरत के बर्तन लेकर लौट रहे ग्राहक
शादी-विवाह वाले परिवार बाजार में आ तो रहे हैं, लेकिन पहले की तरह बड़ी खरीद नहीं कर रहे। स्टील, पीतल और तांबे के भाव बढ़ने से बजट बिगड़ रहा है। ग्राहक सूची में शामिल कई बर्तन छोड़कर केवल जरूरी सामान खरीद रहे हैं। महंगाई का फुटकर कारोबार पर सीधा असर पड़ा है।
-ऋषि अग्रवाल, फुटकर बर्तन कारोबारी।