दवा की कीमतों में हुई वृद्धि भी मरीजों और तीमारदारों का ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) बढ़ा रही है। पिछले छह माह में ही खांसी-जुकाम से लेकर हृदय संबंधी बीमारियों में ली जाने वाली दवाओं की कीमतों में 15 से 20 फीसदी तक की वृद्धि हुई है।
बढ़ती महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है। पिछले छह माह में रक्तचाप, एंटी एलर्जिक, मधुमेह और त्वचा संबंधी दवाएं महंगी हो गई हैं। हालांकि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने एक अप्रैल से 900 से अधिक जरूरी दवाओं की कीमतों में 1.74 प्रतिशत की वृद्धि की थी। लेकिन इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे लोगों की माने तो बाजार में इससे कई गुना ज्यादा की वृद्धि हुई है और यह पहले यह वृद्धि पहले से ही जारी है। दवा कारोबारियों का कहना है कि उन्हें कंपनियों से ही दवाएं महंगी मिल रही हैं।
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कुछ दवाओं की कीमत एक नजर में-
दवा का नाम - प्रयोग – जनवरी में कीमत- अब कीमत
स्टारप्रक्टस - रक्तचाप 376 - 416
वैटनोवेट एन - त्वचा क्रीम 60 - 65
डैक्सोटेज सीरप- ताकत 150 - 190
मॉन्टेलुकास्ट - एलर्जी - 300 - 390
ग्लिमीस्टार एम-2 शुगर 90 115
( टेबलेट की कीमत प्रति पत्ता यानी दस टेबलेट है।)
बातचीत-
दैनिक जरूरत की चीजों के भाव तो बढ़ ही रहे हैं, अब दवाओं की कीमत भी बढ़ गई है। इससे इलाज करा पाना भी मुश्किल हो गया है।
- बबलू भाटिया, तीमारदार।
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बढ़ती महंगाई से जीवन यापन कर पाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में दवाएं महंगी होने से मुश्किल और बढ़ गई है।
- राहुल, तीमारदार निवासी किला गेट।
दवाओं की कीमत लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी से ही दवाएं महंगी आ रही हैं। इसलिए हमें उसी आधार पर दवाएं बेचनी पड़ रही हैं।
नरेंद्र मीडिया प्रभारी, ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोशिएशन हाथरस।
कंपनी से जिस हिसाब से दबाएं आती हैं। केमिस्ट भी उसी के आधार पर दवाओं की बिक्री करते हैं। हमरा प्रयास रहता है मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल कुछ दिनों में दवाओं के रेट बढ़े हैं।
दाऊदयाल शर्मा, जिलाध्यक्ष ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन।