रात में देर तक मोबाइल फोन देखने की आदत युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी शरीर में नींद के लिए जरूरी प्राकृतिक हार्मोन मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इससे नींद का चक्र बिगड़ने के साथ अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
जिला अस्पताल के मन कक्ष में काउंसिलिंग के लिए पहुंचने वाले युवाओं में भी नींद से जुड़ी समस्या प्रमुखता से सामने आ रही है। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. ललित कुमार के अनुसार काउंसिलिंग के लिए आने वाले करीब 70 फीसद युवा किसी न किसी रूप में नींद की समस्या से परेशान हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो रात में सोने के समय भी मोबाइल का इस्तेमाल करते रहते हैं।
अगस्त में मन कक्ष में पहुंचे 38 युवाओं में से 27 में नींद न आने की शिकायत मिली। लगातार देर रात तक जागने की आदत धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है और इसका असर मानसिक स्थिति पर पड़ने लगता है। इससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी, तनाव और काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी सामने आती है। यहीं से अवसाद में जाने की शुरूआत होती है।