पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से संरक्षित एतिहासिक किला राजा दयाराम परिसर में अतिक्रमण का जाल लगातार फैलता जा रहा है। यहां लगातार अवैध तरीके से मकानों का निर्माण किया जा रहा है। पिछले 16 महीनों में 40 नए अवैध कब्जे इस परिसर में चिह्नित किए जा चुके हैं। यह हाल तो तब है, जबकि वर्षों से यहां अवैध कब्जों की शिकायतें हो रही हैं।
चिंताजनक बात तो यह है कि करीब 16 माह पहले तक यहां 392 अवैध निर्माण थे। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 432 हो गई है। अतिक्रमण और अवैध कब्जे रोकने के लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने करीब एक दश पहले किला राजा दयाराम परिसर में चहारदीवारी का निर्माण कराया था। उस समय तक यहां करीब 50 अवैध मकानों का निर्माण चिह्नित किया गया था। इसके बाद यहां अवैध निर्माण रोकने के लिए पुरातत्व विभाग और प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
अवैध निर्माण की सूचना एकत्रित करने के लिए पुरातत्व विभाग की ओर से एक व्यक्ति को यहां केयर टेकर नियुक्त किया गया। वह प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को अवैध निर्माण के संबंध में सूचना देने लगे। बावजूद इसके अवैध निर्माण का सिलसिला नहीं रुका।
नोटिस के साथ पुलिस को दी जाती है सूचना
पुरातत्व विभाग की ओर से अवैध निर्माण के लिए पहले नोटिस जारी किए जाते हैं। निर्माण न रुकने की स्थिति में पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है। पिछले 16 महीनों में यहां करीब 40 अवैध निर्माणों की सूचना दी जा चुकी है। बावजूद इसके पुरातत्व विभाग, प्रशासन और पुलिस इन्हें रोक नहीं पाए।
पुलिस के जाते ही तेज हो जाता है निर्माण
आसपास के लोगों का कहना है कि किला राजा दयाराम परिसर में होने वाले अवैध निर्माण की सूचना पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से पुलिस को दी जाती है। मौके पर पुलिस पहुंचती है और निर्माण कार्य रुकवा देती है। पुलिस के जाते ही मकान तैयार करने की गति को और तेज कर दिया जाता है। निर्माण पूरा होने के बाद कागजी कार्यवाही चलती रहती है।
अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था एतिहासिक
पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक दाऊजी मंदिर हाथरस किला का ऐतिहासिक क्षेत्र है। आजादी से पहले राजा दयाराम के इस किले को अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था। यहां स्थित मंदिर पर हर साल लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। आजादी के बाद किला परिसर में धीरे-धीरे अतिक्रमण होने लगा। अब तो इस क्षेत्र में बस्तियां बस गई हैं और यहां रहने वालों को बिजली-पानी की सुविधा भी मिल रही है।
मंदिर की प्राचीर पर अंग्रेजी फौज ने दागे थे गोले
प्रदेश के हाथरस में किला स्थित मंदिर दाऊजी महाराज का इतिहास करीब 275 साल पुराना है। बताते हैं कि वर्ष 1817 में अंग्रेजी फौज ने राजा दयाराम के किले पर हमला किया था। अंग्रेजों ने राजा के महल और तोपखाना सभी नष्ट कर दिए। राजा ने मंदिर में आकर शरण ले ली। अंग्रेजों ने मंदिर को भी नहीं छोड़ा। मंदिर पर तोप से गोले बरसाए, लेकिन तोप के गोले भी मंदिर का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। गोलों के निशान आज भी मंदिर की प्राचीर पर मौजजूद हैं, जबकि तोप का एक गोला भी मंदिर में सुरक्षित है, जबकि एक गोला पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया है।
एएसआई की ओर से लगातार नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। किसी भी नए मकान के बनने की जानकारी होते ही नोटिस देते हुए पुलिस को इसकी सूचना दी जाती है। टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाती है। बाद में फिर निर्माण कार्य शुरू हो जाते हैं। पिछले कुछ माह में इस तरह की करीब 40 सूचनाएं दी जा चुकी हैं।-मुदस्सर अली, क्षेत्राधिकारी, पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, मथुरा।