इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पेश किए गए निर्णय में प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस कांड मामले में पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए घर देने से राज्य सरकार ने इंकार किया है। राज्य सरकार ने पीड़िता के परिवार की अर्जी पर निर्णय लेकर कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दी।
इसी आठ जनवरी को कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए घर देने की अर्जी पर गौर करने को कहा था। इसके तहत राज्य सरकार की ओर से पेश निर्णय के हलफनामे में कासगंज, एटा या अलीगढ़ जिले में पीड़िता के परिवार को पुनर्वास करने के निर्णय की जानकारी दी गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम इस निर्णय को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए घर देने की मांग से इन्कार करने के रूप में लेते हैं।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश मामले में वर्ष 2020 में स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज कराई गई जनहित याचिका पर दिया। इस विचाराधीन जनहित याचिका की सुनवाई के समय राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि पीड़िता के परिवार ने 2 दिसंबर 2024 को गाजियाबाद या गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास की अर्जी राज्य सरकार को दी है। इसके तहत कोर्ट ने सरकार को इसके लिए छह हफ्ते का समय दिया था।
यह है मामला
हाथरस जिले के गांव में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की युवती से चार युवकों पर सामूहिक दुष्कर्म करने और बेरहमी से पीटने का आरोप लगा था। युवती को पहले जिला अस्पताल, फिर अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। हालत खराब होने पर पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां 29 सितंबर 2020 को उसकी मृत्यु हो गई थी। मौत के बाद आनन-फानन पुलिस ने रात में ही युवती के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद काफी बवाल हुआ। परिवार का कहना था कि उनकी मर्जी के खिलाफ पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार किया है।