हाथरस। प्रदेश सरकार ने सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों के माध्यम से भले ही एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू कराने का दावा किया था, लेकिन जिले के क्रय केंद्रों पर उसके इस दावे की पहले दिन हवा निकलती नजर आई। जिले में कहीं भी पहले दिन जिला प्रशासन की गेहूं खरीद के लिए कोई तैयारी ही दिखाई नहीं दी। निर्धारित 52 गेहूं क्रय केंद्रों में से अधिकांश पर अभी तक बैनर ही नहीं टांगा गया है।
किसानों को उनकी रबी की फसल पर उनके गेहूं का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन ने इस बार सेंट्रल पूल के लिए गेहूं खरीद का निर्णय लिया है। इसके लिए शासन ने 1,525 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है। सभी गेहूं क्रय केंद्रों पर बारदाना, कांटा बाट, खुड़िया एवं नमी की माप के लिए मशीन आदि उपलब्ध करा दी गई है। इसके बावजूद शुक्रवार को सरकारी क्रय केंद्रों का संचालन तो दूर, क्रय केंद्र ही दूर दूर तक दिखाई नहीं दिए।
किसान को अपनी नई फसल का गेहूं मंडी में खुली बोली के आधार पर ही बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि अभी तक गेहूं की आवक काफी कम है। गेहूं बेचने आए किसानों को मंडी में भी सरकारी भाव से अधिक भाव मिलते दिखाई दिए। हाथरस मंडी में नए गेहूं का भाव 1,550 रुपये क्विंटल के आसपास रहा, जिससे किसानों ने भी गेहूं क्रय केंद्रों को ढूंढने में अधिक रूचि नहीं दिखाई।