जिले में किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी दावों के बीच ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) योजना के पोर्टल पर किसानों के पंजीकरण की रफ्तार बेहद सुस्त है। चाहते हुए भी किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए खुला बाजार नहीं मिल पा रहा। जिले में 2.25 लाख किसानों को ई-नाम से जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 31,069 किसान ही पोर्टल पर पंजीकृत हो सके हैं। करीब 86 प्रतिशत किसान अभी भी योजना के दायरे से बाहर हैं।
इससे भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति मंडी में होने वाले डिजिटल भुगतान की है। 35,654 क्विंटल कृषि उपज के 2096 लॉट का 8.15 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, लेकिन ई-पेमेंट के जरिये भुगतान महज 0.01 करोड़ रुपये यानी एक लाख रुपये ही हुआ। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर पारदर्शी और डिजिटल मंडी व्यवस्था देने की योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
ई-नाम व्यवस्था में गुणवत्ता जांच और पारदर्शी बोली प्रक्रिया अहम कड़ी है, लेकिन यहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। कुल 2096 लॉट में से सिर्फ 810 लॉट की गुणवत्ता जांच की गई। यानी आधे से अधिक कृषि उपज बिना आधिकारिक गुणवत्ता जांच और ग्रेडिंग के ही कारोबार में चली गई। इससे ई-नाम की पारदर्शिता और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
946 व्यापारी-आढ़ती, फिर भी डिजिटल व्यवस्था कमजोर
मंडी में 946 व्यापारी और आढ़ती पंजीकृत हैं। इसके बावजूद डिजिटल बोली और ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती नजर नहीं आ रही है। 8.15 करोड़ रुपये के कारोबार के मुकाबले महज एक लाख रुपये का ई-पेमेंट बताता है कि मंडी में अभी भी नकद और ऑफलाइन लेनदेन का पुराना ढर्रा हावी है। ऐसे में सवाल यह है कि जब ई-नाम का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी बाजार, प्रतिस्पर्धी बोली और सुरक्षित डिजिटल भुगतान उपलब्ध कराना है तो मंडी प्रशासन इस व्यवस्था को जमीन पर लागू कराने में क्यों नाकाम है?
आंकड़े ही खोल रहे व्यवस्था की पोल
ई-नाम से जुड़ने वाले किसानों की बेहद कम संख्या, डिजिटल भुगतान का नगण्य आंकड़ा और गुणवत्ता जांच के दायरे से बाहर रहे लॉट, ये तीनों आंकड़े मिलकर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। योजना का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है, लेकिन मौजूदा स्थिति में बड़ा हिस्सा अभी भी पारंपरिक मंडी व्यवस्था पर निर्भर है।
यह है ई-नाम योजना
ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश की कृषि मंडियों को एक नेटवर्क से जोड़ना था, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी मूल्य मिल सके और उनकी आय दोगुनी हो सके। इस पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल के जरिये किसान अपनी फसल को देश की किसी भी मंडी में ऑनलाइन बोली के माध्यम से बेच सकते हैं और सीधा भुगतान अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों से ऑनलाइन माध्यम से फसल की बिक्री कराई जा रही है। योजना के तहत किसानों के पंजीकरण किए जा रहे हैं।
-अनिल कुमार, मंडी सचिव
शहर के एक सुपर मार्केट में 65 रुपये किलो चीनी का लगा परचा। संवाद- फोटो : Samvad